रचनाकार। -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव (छ. ग.)
शीर्षक --- माँ बम्लेश्वरी
विधा -- लेख
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राजनांदगांव जिले का डोंगरगढ़ देवी बम्लेश्वरी कि मंदिर होने के कारण ऐतिहासिक नगरी है।यहाँ बम्लेश्वरी की दो मंदि है , पहला एक हजार फीट ऊँचा है ।जिसे बडी़ बम्लेश्वरी कहा जाता है । एक नीचे है जिसे छोटी बम्लेश्वरी कहा जाता है ।
यहां नवरात्र के समय वर्ष में दो बार भव्य एवं विशाल मेला लगता है । जिसमें लाखों की संख्या में दर्शनार्थी भाग लेते हैं ,
प्राचीन काल में इस नगरी को कामाख्या और डुंग राज्य के नाम से भी जाना जाता था ।
प्राचीन नामों से प्रसिद्ध डोंगरगढ़ में प्राप्त खंडहरों और प्राप्त स्तंभों की बनावट और कारीगिरी ,शैली के आधार पर शोध कर्ताओं ने इसे बारहवीं , तेरहवीं सदी का , कल्चुरी काल का बताते हैं ।
किन्तु अन्य सामग्री मूर्ति के गहने ,अनेक वस्त्र ,आभूषण , मोटे होंठ ,एवं मस्तक ,के लंबे लंबे सूक्ष्म मिमांसा करने पर इस क्षेत्र की मूर्तिकला एवं गोडकला को परिलक्षित करती है।
इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि सोलहवीं शताब्दी तक पुरा राज्य नगर गोंड राजाओं क आधिपत्य में था ।
जिससे रज्य में सुख शांति , तथा व्यवस्था अच्छे से स्थापित थी ।यहाँ की प्रजा भी उन दिनों काफी संपन्न थी ।जिसके कारण मूर्ती शिल्प गृह निर्माण कला का उपयुक्त वातावरण था ।
लोकमतानुसार अब से 2200 वर्ष पहले डोंगर गढ़ प्राचीन नाम कामाख्या नगरी में राजा वीर सेन का शासन था । जो कि निः संतान था । पुत्र रत्न की कामना हेतु उसने महिषमति पूर स्थित शिवजी और भगवती दुर्गा की उपासना की ।जिसके फलस्वरुप रानी को एक वर्ष बाद पुत्र प्राप्त हुआ ।
ज्योतिषियों ने नामकरण किया । और पुत्र का नाम मदन सेन रखा ।और उन्हें भी भगवान शिव और माँ दुर्गा की कृपा से पुत्र रत्न की
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बस इसी से प्रेरित होक कामाख्या नगरी में माता बम्लेश्वरी के मंदिर का निर्माण कराया गया ।
मां बम्लेश्वरी को जगदंबा , अर्थात, जिसमें भगवान शिव जी की शक्तियाँ निवास करती है । के रुप में जाना और माना जाने लगा , पूजा जाने लगा ।
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रचनाकार
प्रवीण कुमार ठाकुर
पतोरा,छुरिया,राजनांदगाँव (छ.ग.)
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