Tuesday, June 9, 2020

छत्तीसगढ़ के जाँजगीर-चाम्पा से गिरधारी लाल चौहान द्वारा सृजनित लेख- तुर्रीधाम

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---लेख
शीर्षक--- तुर्रीधाम
व्याख्या---- जांजगीर-चांपा जिले के अन्तर्गत कई धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल है-जैसे शिवरीनारायण, पीथमपुर,मां अष्टभुजी अड़भार, चन्द्रपुर की चन्द्र हासिनी देवी की मंदिर,ऋषभतीर्थ,बड़गड,का शिव मंदिर , मनका माता,सक्ती का महामाया मंदिर,भोथिया में मनका माता मंदिर ,नंदौर कला 
सारंगढहीन माता का गढ़,सरहर में शमलाई माता का मन्दिर ग्राम छेरकाभांठा नवापारा खुर्द में कभी न सुखने वाला तालाब आदि ।
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 तुर्रीधाम-छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सक्ती तहसील अन्तर्गत ग्राम तुर्री में तुर्रीधाम स्थित है । यहां भगवान शिव का ऐसा मंदिर है, जहां अंदर से जल की धारा लगातार बह रही है।उसका स्वाद नारियल की पानी की तरह है।इसकी विशेषता यह है कि यह जलधारा लगातार बह रही है किसी को मालूम नहीं है ।उसका स्वाद नारियल की पानी की तरह है,इसकी विशेषता यह है कि यह जलधारा कहां से बह रही है अब तक किसी को ज्ञात नहीं है । प्राचीन किस्से कहानी के अनुसार ऋषभतीर्थ में उड़द का दाल धोने से उसका छिलका यहां आ जाता है ।ऐसा लोगों का कहना है ।हर समय पानी की धार बहती रहती है ।
                  बरसात में जल धारा कम हो जाता है,गर्मी में बढ़ जाता है । जलधारा की एक विशेषता है कि गंगा जल की तरह यह खराब नहीं होता ।लोग इस जल को गंगा जल की तरह मानते हैं, घर ले जाने के लिए सभी नर नारी उत्सुक। रहते हैं ।
                 यहां दर्शन के लिए मध्यप्रदेश, झारखंड, उड़ीसा , बिहार के लोग आते हैं और दर्शन करके चकित हो जाते हैं ।जो एक बार तुर्रीधाम पहुंचता है, दुबारा आने का प्रयास करता है ।
                  तुर्रीधाम मंदिर की समिति के सदस्य कृष्ण कुमार जायसवाल ने बताया कि तुर्रीधाम के भगवान शिव के दर्शन से सतान प्राप्ती होती है ।नि: संतान दम्पति भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां महाशिवरात्रि में 15दिनोंका मेला लगता है ।
                   सावन महिने के प्रत्येक सोमवार तथा सभी सोमवार एवं महाशिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ हजारों की संख्या में रहती हैं।अपनी विशेषताओं के कारण आज तुर्रीधाम जिला में ही नहीं छत्तीसगढ़ में ही नहीं वरन देश के अन्य राज्यों में भी अपनी एक अलग पहचान है।
                  यहां शिव मन्दिर के अलावा श्री राधे कृष्ण मंदिर,राम जानकी मंदिर, हनुमान जी की मंदिर भी बनी हुई है।
                  यहां विभिन्न जाति समुदाय के द्वारा धर्मशाला का निर्माण किया गया है जैसे साहू समाज द्वारा, चौहान समाज द्वारा,यादव समाज द्वारा,महंत समाज द्वारा, निषाद समुदाय द्वारा आदि।
                            ऊं नमः शिवाय

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