पता -रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा -गद्य लेखन
शीर्षक- "रायगढ़ की विविधता"
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सांस्कृतिक धरोहर से सुसज्जित, केलो का कल कल प्रवाह, पहाड़ की वादियों से झांकता हुआ महावीर बजरंगबली के लिए निर्मित पहाड़ मंदिर की घंटियां, रेल की ट्रेन की छुक छुक, और धुआं उगलती हुई जिंदल पावर लिमिटेड की चिमनियां यह कुछ विशेषताएं हैं तबला पखावज वादक एवं कत्थक के महान संगीत प्रेमी *राजा चक्रधर सिंह* की कर्मभूमि रायगढ़ राजघराने की । दूर-दूर तक अपनी ख्याति फूलों के खुशबू की तरह फैलाते हुए चक्रधर सिंह ने अपना अमिट योगदान दिया, ना केवल संगीत एवं नृत्य में बल्कि साहित्य के क्षेत्र में भी उनका स्थान अतुलनीय था, उनके द्वारा लिखित रचनाओं में तालबल पुष्पाकर, नर्तन सर्वस्व,मूरजवर्ण पुष्पाकर, राग रत्न मंजूषा, एवं 32 किलो वजनी पुस्तक तालतोय निधि आज भी नृत्य संगीत एवं साहित्य की छटा बिखेरने में लगी हुई है जो विशेष साहित्यकारों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चारों ओर का वृक्ष आवरण एवं पहाड़ी वादियों का मनोरम दृश्य किसी को भी अपनी ओर आकृष्ट कर सकता है। पास में ही राम झरना भगवान श्री राम के रामायण कालीन थाती संभाले हुए हैं । कबरा पहाड़ एवं सिंघनपुर गुफाओं में स्थित तत्व कालीन अभिलेख एवं भित्ति चित्रात्मक कलाकृतियां ऐतिहासिक *धरोहर के रूप में* सर्वविदित हैं ।
एशिया की सबसे अधिक स्टील बनाने वाली कंपनी में जिंदल स्टील का नाम उल्लेखित है, एक ओर आधुनिकता का परिवेश तथा एक ओर *छाती दलते* हुए यह धूम्रपान करती हुई चिमनियां आंखों को नम करने के लिए काफी हैं, साहित्य विधा में अग्रणी यह क्षेत्र नए साहित्यकारों के लिए एक चुनौती के रूप में *प्रश्नचिन्ह बनकर* खड़ा है। नन्हे नन्हे हाथों में कलम की जगह मोबाइल थमाकर हम इनसे नवराष्ट्र निर्माण हेतु अपेक्षा नहीं कर सकते ।
कल नहीं आज ही हमें एक प्रभावी कदम उठाना होगा, सेठ किरोड़ीमल ने भी इस क्षेत्र को संभालने में अपना सब कुछ दान कर दिया, ऐतिहासिक सांस्कृतिक और साहित्यिक विधाओं से परिपूर्ण इस क्षेत्र की सुंदरता को पुनः स्थापित करना होगा ।
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गुलशन खम्हारी" प्रद्युम्न"
Bahoot achchha hai G
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