जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---मुहावरा पर आधारित कविता
शीर्षक--- आधा तीतर आधा बटेर
व्याख्या--कवि के द्वारा व्यक्ति के कथनी एवं करनी पर प्रकाश डाला गया है ।
************************************************
आधा तीतर आधा बटेर
काम तुम्हारा लगता मुझे,आधा तीतर आधा बटेर।
क्यों करते हो छोटे से जीवन , ...में इतना हेर फेर ।
सच्चाई की बात करते, ......झूठ ही बोलते रहते हो ।
दान पुण्य का डंका , किसी को फूटी कौड़ी न देते हो ।
कांव कांव कौआ सा रहना, .....कोयल सा क्यों टेर।
नास्तिकता से भरा तन मन, ईश्वर पूजन की बात करे ।
दया प्रेम करुणा का विरोधी, सज्जनता का रुप धरे ।
कभी फूंक मारने भर से,उड़ सकता क्या महान सुमेर ।
सादगी तुम्हारा दिखावे का,... रंगों से भरपूर स्नेह ।
जिसका तन खर जैसा, ..वो कहां पाये धेनु का देह ।
गंगा में भी जो रोज नहाये ,हो नहीं सकता बेर से केर ।
जहर पिलाने वाले से, मुझे अमृत की अभिलाषा ।
इस जन्म क्या किसी भी जन्म में,न होगी आशा ।
तुझको दुनियां से है जल्दी,...उससे कहां का देर ।
चेहरा तेरा फूलों जैसा, मन पत्थर सा भारी ।
प्रेम नहीं तुझसे घृणा करते, यहां वहां नर नारी ।
मानअन्तर तो है ही जग में, नारियल और कनेर ।
गिरधारी लाल चौहान
No comments:
Post a Comment