Saturday, June 6, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- किसान

रचनाकार- जगतसिंह ठाकुर'बंजारीवाले'
स्थान-सारंगढ़ , जिला-रायगढ़
विधा-दोहा छन्द
शीर्षक-'धरती के भगवान किसान'
               ०××××××०
धरती के  भगवान  हैं , हमारे सब किसान ।
खेतों में  कर  मेहनत , फसल उगाते जान ।।१।।
वर्षा-शीत - ताप सहें , होते      धीरजवान ।
वर्षा   में   भीगते   हैं , कीचड़  सहें समान ।।२।।
शीत की  झोंके को है , सहते   दे  मुस्कान ।
गर्मी की  तपन को ये , झेलते नियति जान ।।३।।
पसीना तन से  बहता , रोम-रोम प्रति मान ।
पूजक हैं  परिश्रम  के , कृषि होती पहचान ।।४।।
करके  कठोर मेहनत , करते   अन्न   प्रदान ।
खेत  इनके  मंदिर  हैं , गिरिजाघर भी जान ।।५।।
गुरुद्वारे - मस्जिद  रहे , श्रम  होता भगवान ।
खेतों  में  काम करना , पूजा - पाठ  समान ।।७।।
इनके  तीरथ - धाम हैं , खेत और खलिहान ।
प्रति रोज दर्शन करते , होते   साँझ - बिहान ।।८।।
हल-बैल उनके साथी , खेत   हैं  जी - परान ।
अन्न   उगाना  धर्म  है , उपासना  यह  जान ।।९।।
जगती  का  अन्नदाता , करता  क्षुधा निदान ।
पेट पालता  सभी का , श्रम का दे  बलिदान ।।१०।।
रात-रात  भर  जागके , फसल  बचाये  धान ।
कर्ज लेके कभी-कभी , जब   हुआ  परेशान ।।११।।
तब आत्महत्या करके , छोड़   जाता  जहान ।
करे नमन'ठाकुर' उन्हें , होते   कृषक   महान ।१२।।
                   ०××××××०

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...