Saturday, June 6, 2020

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- किसान

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा कविता
शीर्षक किसान के पीरा

हमर भारत देश ह,
कहलाथे किसान प्रधान देश।
किसान इन्हा दिन रात करथे,
खून पसीना एक।
तब जाके किसान ह पाथे ,
दू जून के रोटी।
अ ऊ हमर भारत देश ह,
कहलाथे किसान प्रधान देश।
किसान मन ह दिन रात मेहनत करथे,
धरती मां के कोरा मा।
अ ऊ उपजाथे किसम किसम के,
अनाज ये देश बर।
जेला खाके मो टावतहन ,
सब्बो जन मनुष्य।
अ ऊ किसान ह दुगरावत है,
अपन पेट पाले पोसे बर।
ये देश म कोन हे,
किसान के दुख पीरा सुनीय्या।
एक रे सेती ओकर लइका हा,
नई बनना चाहे किसनहा।
बड़े किसान अ ऊ बढ़त है,
छोटे ह कर्जा म लदा वत हे।
इंहा के नियम,
समझ नई आवे।
छोटे किसान ला भी पनपन दो,
इही देश के शान हे।
अगर किसान अन्न नई उपजाही, त काला खाही मानुष ह।
ए मानुष तै अभी समझ ले,
किसान हे त सारा संसार हे।
किसान धरती के असली सपूत है,
किसान हे त धरती स्वर्ग समान हे..... 

 सूर्य प्रकाश पाटिल

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