जिला बेमेतरा
विधा कविता
शीर्षक किसान के पीरा
हमर भारत देश ह,
कहलाथे किसान प्रधान देश।
किसान इन्हा दिन रात करथे,
खून पसीना एक।
तब जाके किसान ह पाथे ,
दू जून के रोटी।
अ ऊ हमर भारत देश ह,
कहलाथे किसान प्रधान देश।
किसान मन ह दिन रात मेहनत करथे,
धरती मां के कोरा मा।
अ ऊ उपजाथे किसम किसम के,
अनाज ये देश बर।
जेला खाके मो टावतहन ,
सब्बो जन मनुष्य।
अ ऊ किसान ह दुगरावत है,
अपन पेट पाले पोसे बर।
ये देश म कोन हे,
किसान के दुख पीरा सुनीय्या।
एक रे सेती ओकर लइका हा,
नई बनना चाहे किसनहा।
बड़े किसान अ ऊ बढ़त है,
छोटे ह कर्जा म लदा वत हे।
इंहा के नियम,
समझ नई आवे।
छोटे किसान ला भी पनपन दो,
इही देश के शान हे।
अगर किसान अन्न नई उपजाही, त काला खाही मानुष ह।
ए मानुष तै अभी समझ ले,
किसान हे त सारा संसार हे।
किसान धरती के असली सपूत है,
किसान हे त धरती स्वर्ग समान हे.....
सूर्य प्रकाश पाटिल
Very good..👌👌👌
ReplyDeleteबहुत सुन्दर 👍👍👍
ReplyDeleteबेहतरीन कविता 👌👌
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