स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ {छग}
विधा--कविता
शीर्षक--'रक्तदान करने आगे आयें'
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विश्व रक्तदान दिवस आया , आओ मुहिम चलायें ।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।
एक से एक दान जहां में , अन्न - वस्त्रादि पानी ,
कई चरित्र कई गाथाएँ , पुराणों ने बखानी ।
रक्तदान महा दान होता , लोगों को समझायें ।।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।१
रोगी का रक्त की कमी से , तन पीला पड़ जाता ,
सारे अंग सुस्त पड़ जाते , कोई काम न भाता ।
मौत के मुँह उसे जाने से , रक्त देकर बचायें ।।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।२
दुर्घटना से कभी किसी का , अंगभंग हो जाता ,
सारा खून निकल जाता है , समाप्त होने आता ।
जान बचायें रक्तदान से , देवदूत बन जायें ।।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।३
रोगी को है खून चढ़ाये , नवजीवन मिल जाता ,
समय पूर्व काल के गाल में , जाने से बच जाता ।
देके रक्त आप रोगी का , जीवन काल बढ़ायें ।।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।४
भयभीत न हों रक्तदान से , खुद से आगे आना ,
कमजोरी न थकावट आये , जरा नहीं घबराना ।
स्वयं समझें दूसरों में भी , जन जागृति हम लायें ।।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।५
सबसे बड़ा धर्म जगती में , रहा जीवन बचाना ,
रक्तदान 'ठाकुर' करने को , सतत सामने आना ।
जान बचा रोगी-आहत की , आओ पुण्य कमायें ।।
रक्तदान स्वेच्छा से करने , मिलकर आगे आयें ।।६
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व्याख्या--रक्तदान के महत्त्वपर प्रकाश डाला गया
है ।
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