Saturday, June 13, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- रक्तदान

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ {छग}
विधा--कविता
शीर्षक--'रक्तदान करने आगे आयें'
                         ०××××××०
विश्व रक्तदान दिवस आया , आओ मुहिम चलायें ।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे आयें ।।
एक  से  एक  दान जहां में , अन्न - वस्त्रादि  पानी ,
कई   चरित्र   कई   गाथाएँ , पुराणों   ने   बखानी ।
रक्तदान   महा  दान   होता , लोगों  को  समझायें ।।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे आयें ।।१
रोगी का  रक्त की  कमी से , तन पीला पड़ जाता ,
सारे अंग  सुस्त  पड़  जाते , कोई  काम  न भाता ।
मौत के  मुँह  उसे जाने  से , रक्त    देकर   बचायें ।।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे आयें ।।२
दुर्घटना से कभी किसी का , अंगभंग   हो   जाता ,
सारा खून  निकल जाता है , समाप्त   होने  आता ।
जान   बचायें  रक्तदान  से , देवदूत    बन    जायें ।।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे  आयें ।।३
रोगी  को   है  खून  चढ़ाये , नवजीवन मिल जाता ,
समय पूर्व काल के गाल में , जाने  से   बच  जाता ।
देके  रक्त   आप  रोगी का , जीवन   काल  बढ़ायें ।।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे  आयें ।।४
भयभीत न हों  रक्तदान से , खुद  से   आगे  आना ,
कमजोरी न थकावट आये , जरा    नहीं   घबराना ।
स्वयं  समझें  दूसरों में  भी , जन जागृति हम लायें ।।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे  आयें ।।५
सबसे  बड़ा  धर्म जगती में , रहा   जीवन   बचाना ,
रक्तदान  'ठाकुर' करने को , सतत   सामने   आना ।
जान बचा रोगी-आहत की , आओ  पुण्य   कमायें ।।
रक्तदान  स्वेच्छा  से  करने , मिलकर  आगे  आयें ।।६
                        ०×××××××०
व्याख्या--रक्तदान के महत्त्वपर प्रकाश डाला गया
              है ।

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