Thursday, June 18, 2020

जाँजगीर-चाम्पा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- चंदा

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा, छत्तीसगढ़
विधा---छत्तीसगढ़ी गीत
शीर्षक---  मोला चंदा बनादे
व्याख्या---- प्रस्तुत गीत में नायक नायिका से कह रहा है कि मुझे चंदा तु बनादे और तू चांदनी बन जा । उसके बाद मैं तेरा गीत गाऊं और तू मेरा गीत गा । मेरा यही स्वप्न और कल्पना है इसको साकार कर दे ।सोच विचार मत कर हंसते हुए बता। मैं इन नैनों में पा चुका हूं दिल में पाना चाहता हूं । जीवन रुपी गाड़ी हैं साथ मिलकर चलाना है , मैंने अब दिल में बसा लिया तु भी मुझे बसा ले ।
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मोला चंदा बनादे

मोला चंदा बनादे, तैं चंदैनी बन जा ।
फेर तोर गांवंव गीत, तैं मोर गीत गा ।

एही मोर सपना हे, ....एही कल्पना हे ।
एला सिरझादे संगी,एही मोर कहना हे ।
हांस के बता,....गुनुन मुनुन झन लगा ।

नैना म तोला पायें, ...अब दिल म पाना हे ।
जिनगी के गाड़ी संगी, तोर संग चलाना हे ।
ए दिल तोला बसा डारें,चल महुं ल बसा ।

हाथ मैं लमा डारे, ...हाथ म तैं हाथ दे ।
मोला साथी चाही संगी,मोर तैं साथ दे ।
मन मया के सागर, तैं नदिया बन समा ।

2 comments:

  1. छततीसगढ़ी भाषा के बात ही अलग होथे...बहुत सुंदर रचना...

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  2. Tarun kumar barethJuly 6, 2020 at 11:32 AM

    सर आपने बहुत अच्छा लिखा है, तीसरे पद की पंक्तियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी।

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