जिला----जांजगीर -चाम्पा, छत्तीसगढ़
विधा---छत्तीसगढ़ी गीत
शीर्षक--- मोला चंदा बनादे
व्याख्या---- प्रस्तुत गीत में नायक नायिका से कह रहा है कि मुझे चंदा तु बनादे और तू चांदनी बन जा । उसके बाद मैं तेरा गीत गाऊं और तू मेरा गीत गा । मेरा यही स्वप्न और कल्पना है इसको साकार कर दे ।सोच विचार मत कर हंसते हुए बता। मैं इन नैनों में पा चुका हूं दिल में पाना चाहता हूं । जीवन रुपी गाड़ी हैं साथ मिलकर चलाना है , मैंने अब दिल में बसा लिया तु भी मुझे बसा ले ।
************************************************
मोला चंदा बनादे
मोला चंदा बनादे, तैं चंदैनी बन जा ।
फेर तोर गांवंव गीत, तैं मोर गीत गा ।
एही मोर सपना हे, ....एही कल्पना हे ।
एला सिरझादे संगी,एही मोर कहना हे ।
हांस के बता,....गुनुन मुनुन झन लगा ।
नैना म तोला पायें, ...अब दिल म पाना हे ।
जिनगी के गाड़ी संगी, तोर संग चलाना हे ।
ए दिल तोला बसा डारें,चल महुं ल बसा ।
हाथ मैं लमा डारे, ...हाथ म तैं हाथ दे ।
मोला साथी चाही संगी,मोर तैं साथ दे ।
मन मया के सागर, तैं नदिया बन समा ।
छततीसगढ़ी भाषा के बात ही अलग होथे...बहुत सुंदर रचना...
ReplyDeleteसर आपने बहुत अच्छा लिखा है, तीसरे पद की पंक्तियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी।
ReplyDelete