Wednesday, June 3, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरबा से गोमती सिंह की रचना- अहंकार

रचनाकार का नाम-गोमती सिंह 
जिला कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा-कविता 
शीर्षक " अहंकार "
प्रस्तुत है कविता-
लाख धुतकारती हूँ  मैं इसे ,

फिर भी दबे पाँव आ जाता है ,

कहते हैं- कार से इसका नाता है ,

मगर कार तो कई  होते हैं!

इक होता उपकार मगर, 
अहंकार इसको कहते हैं  । 
         ।। इति।।
    गोमती सिंह 
ब्याख्या- प्रस्तुत कविता में रचनाकार ये कहना चाह रही है कि अहंकार कैसे मानव मस्तिष्क में घुस जाता है । अहंकार से बचने के लिए निरंतर स्वयं के स्वभाव का चिंतन करते रहना पड़ता है ।
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1 comment:

  1. अहंकार शिर्षक पर कवियित्री मनुष्य के अंनर्तमन में छुपी दुर्रभावना से स्वयं को सचेत रहने का आग्रह करना चाहती हैं

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