----------'-----,----------------
रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान"
*निवास-रायपुर (छ.ग)
*जिला-रायपुर ।
*शीर्षक--""उजियारा ""
*विधा-छ्न्द मुक्त ।
-------------,----------,,,,-----------,,,----
*****""उजियारा ""********
---------------
मेरा जग में जलना,
अन्धकार को मिटाना ,
नियति सदियों पुरानी ।
इक तुम्हारा उजियारा,
मेरे आँगन में,
जीवन ज्योति जलाए ।
अन्तश के अँधियारे में,
क्यों था मैं भटका,
सुधि दिलाया जो आपने ।
इस पर्व में,
आओ इक दीप,
साथ-साथ जलाए ।
साथ-साथ चलने की ,
कसमें खायें------
ऐसी राह औरों को,
भी बताएँ ।
पर्व की खुशियां बाँट रहा हूँ मै,
जरा एहसास का दामन फैलायें ।
अचानक जब भी मिलेंगे कभी,
हम-तुम,अजनबी न होकर ,
पुराने परिचितो सा----
इक दीपक की तरह ।।
====$$$$$=========
-एच एस अरमो
-------------------------,,,---------------
व्याख्या-इस रचना के माध्यम से यह बतलाने का प्रयास किया है कि पर्व के साथ दीपक का उजियारा करना पड़ता है ।जिससे प्रेमी के द्वारा उपमा स्वरुप यह सन्देश लिखा जा रहा है ।
----------***********-----------------
No comments:
Post a Comment