Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- प्रेम

रचनाकार- श्रीमती उर्मिला सिदार
 जिला -रायगढ़
 विषय -कविता (प्रेम से संबंधित)
 विधा -गीत
 शीर्षक -"तुझे समझने लगी हूं"



      मुझे समझने लगी हूं
 तुझे पहले से ज्यादा समझने लगी हूं ।
खयालों में तेरी मैं डूबने लगी हूं ।
तू मेरा मोहन ,मैं तेरी राधा।
 मेरी तेरी जिंदगी में ना आए  बाधा।
 तू मेरा बल है, मैं तेरी शक्ति ।
 तेरी दुआ से मुझे मिल जाए भक्ति।
मै तेरी गरीमा, तू मेरी महीमा।
 तू मेरा ललित ललाम, मैं तेरी मनोरमा।
 तू मेरा प्रकृति ,मैं तेरी संस्कृति।
 तू मेरा विधाता, मै तेरी नियति।
 तेरी वैभव मैं ,समझने लगी हूं।
 खयालों में तेरी ,मैं डूबने लगी हूं।
 व्याख्या- इस कविता से कवित्री अपने प्रियतम को पहले से अधिक जाने लगती हैं और एक दूसरे का पूरक का बनकर जीवन में जीने का कल्पना करते हैं वह कभी प्रियतम को मोहन के रूप में तो कभी बल के रूप में तो कभी ललित ललाम प्रकृति के रूप में देखते हैं और स्वयं को उसकी गति मानते हुए उनका वैभव का बखान करते हैं।

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