Monday, June 22, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- जीवन

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर
 विषय-यमक अलंकार का प्रयोग करते हुए मुक्त छंद


जीवन के हर रंगों 
    पर इंद्रधनुषी लहर छा गई,
उषा की लाली स्वंय 
       लाली भी शर्मा गई।

प्रखर सूर्य की किरणें 
        आसमाँ को भेद गई,
काली घटा का घमंड    
       यूँ ही वह  घटा गई।

प्रकृति की खूबसूरती 
       जग के मन को भा गई,
रति भर सौंदर्य को देख 
        रति स्वंय भरमा  गई।

भरे सरोवर में श्वेत
       कुमुदिनी मुस्कुरा गई,
नलिन को देख नलिन 
       बिन संध्या मुरझा गई।

पावस की हरीतिमा से
     मन प्रफुल्लित हो गई,
धरा  का  सौंदर्य   से      
       धरा ही  कुम्हला गई।


यमक का प्रयोग-
1.लाली -  सूर्योदय की  लालिमा                     
लाली-लाल रंग

2.घटा
घटा-बादल
घटा-कम होना

3.रति
रति-थोड़ा
रति-कामदेव की पत्नी

नलिन
नलिन-कमल
नलिन-एक नाम

धरा
धरा-पृथ्वी
धरा-एक नाम
____________________
   नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ .ग.)

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