कलम नाम - दिल के अल्फ़ाज(KTL)
जिले का नाम- बलरामपुर(छत्तीसगढ़)
शीर्षक:- सिर्फ मेरी हो
विधा:- कविता
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तुम मेरी हो सिर्फ मेरी हो
तुम्हें हर नज़र से बचाऊँगा
मेरे बाहों के गिरफ्त में
तुमको सबसे दूर ले जाऊँगा
श्रृंगार करना सिर्फ मेरे लिए
दूसरे के सामने मत आना तुम
किसी और ने की तारीफ़ तुम्हारी
सजा के लिए तैयार रहना तुम
दर्द का दवा प्यार से लगाऊंगा
बिना इजाजत पाव मत रखना तुम
कील वाली सैंडिल के लिए तैयार रहना
घाव को चूम के दवा लगाऊंगा
फिर ये गलती मत करना तुम
पैरों को बांध कमरे में बंद रखूँगा
प्यार बेपनाह करता हूँ तुमसे
आँखे उठा के मत देखना किसी को
उसकी जान जायेगी और...तुम्हारे
सजा बढ़ेंगी,दर्द मुझे होगा
आँखों से तुम्हारी आँखों में समा जाऊँगा..
©दिल के अल्फ़ाज(KTL)
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व्याख्या:- प्यार के दो रूप होते है,एक जो केवल प्यार करता है और उसके लिए कुछ भी कर सकता हैं। और दूसरा रूप भी पहले जैसे होता है लेकिन कुछ अलग हो भी अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकता हैं, खुद के प्यार का मौत भी कर सकता और दूसरे का भी और खुद का भी..उसके सामने उसके प्यार ने खुद को गलती से खरोंच भी लिया तो उसे प्यार की तकलीफ दिखेगी और फिर उसे तकलीफ देने वालों को सजा देता और उसके बाद अपने प्यार को की वो क्यो वहाँ गयी थी।। इनका प्यार कब हिंसात्मक हो जाता हैं। उन्हें भी नहीं पता होता हैं।
इसे में dark side of love कहता हूँ।।
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