Saturday, May 16, 2020

छत्तीसगढ़ के जांचगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- मेरे प्यार...

नाम---गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ़
विधा-गीत
शीर्षक--मेरे प्यार की दुनियां में


व्याख्या--नायक द्वारा नायिका को अपने प्यार की दुनियां में
चले आओ कहकर गीत के माध्यम से बुलाया जाता है। आने पर पास ही रहना गायब न होने की बात किया गया है । और नायक के द्वारा वादा लिया जाता है अपनी दुनियां में रहने के लिए कहा जाता है।नायक द्वारा हंसने मुस्कुराने की बात कहा गया साथ में हम भी चाहते हैं इच्छा प्रकट किया गया है । हरदम ऐसे ही मुस्कुराते रहना कहा गया है। चेहरे और बालों में लगे फूल की तारीफ किया गया है जिसे देखकर कोई भी सुध बुध खो बैठेगा । तुम की बात आज से मत करना आज से हम बन जाते हैं । नायिका द्वारा नायक को लगातार देखने पर नायक कहता है मैं क्या कह दिया मुझे लगातार देखे जा रहे हो। मैं क्या कह दिया धिरे से उसको बताओ।प्यार में ज्यादा शांत रहना ठीक  है गरम होना उपयुक्त नहीं है ।
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मेरे प्यार की दुनियां में

मेरे प्यार की दुनियां में,चले आओ तुम।
आकर पास ही रहना,न होना कभी गुम ।

मैं इतना चाहूं वादा, इससे न कोई ज्यादा ।
मेरे लिए  दुनियां छोड़ो,बदलो अपना इरादा ।
बस इतना बस इतना,न  ज्यादा न कुछ कम ।

जरा हंसकर दिखाओ,हम देखना चाहते हैं ।
थोड़ा और मुस्कुराओ, साथ हंसना चाहते हैं ।
 हरदम ऐसी हंसती रहना,रोने से निकलता दम ।

ये चांद सा चेहरा और, खूबसूरत बालों में ये  फूल ।
हम ही क्या  देखकर इन्हें, कोई भी जाये सब भूल ।
तुम तुम की दीवार छोड़ो,आओ बन जायें आज हम ।

क्यों देख रहे हो मुझे,   मैंने क्या कह दिया ।
दिल से बोलो एक बार,   क्या तुमने सुन लिया ।
आहिस्ता-आहिस्ता बोलिए,कर्मों हो रहे गरम ।

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