राज्य- उत्तर प्रदेश,
कविता -
लॉकडाउन तीन बस चौदह दिन
थोड़ा सा सब्र, फिर अच्छे दिन
हां यह घड़ी थोड़ी मुश्किल है
क्योंकि यह ज़िद्दी दुश्मन किसी से डरता नहीं है
डर नहीं लगता इसे पुलिस की बंदूकों से
ना ही इसे डर लगता है डॉक्टर की सुई से
मास्क सैनिटाइजर से डरता है यह दुश्मन
घर के अंदर आने से डरता है इसका मन
माना कि आज हर दरवाज़े पर खीचा है लक्ष्मण रेखा
पर घर पर रहकर हमने ज़िन्दगी का महत्व सीखा
आओ हम युद्ध जारी रखे साथ मिलकर
क्योंकि अब तो चैन की सांस आएगी दुश्मन को भगाकर
क्योंकि यह लॉकडॉउन तीन है बस चौदह दिन
Nice poem suits the current situation pls add more poems like this मनोरंजन के लिए धन्यवाद |
ReplyDeleteAutstanding����
ReplyDeleteBerry Goood
ReplyDeleteश्रीमती ,
ReplyDeleteआपकी कविता ने मुझे प्रोत्साहित किया की मैं भी ऐसे स्तिथि पर एक कविता लिखूँ
धन्यवाद
संध्या कुमारी
आप सबको धन्यवाद ।
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