Monday, May 4, 2020

56 साहित्यकारों द्वारा 4 मई 2020/सोमवार को कोरोना विषय पर आधारित कविताएं.....

____________01___________
1- रचनाकार-अवधेश कुमार वर्मा                                                     'कुमार'
2- राज्य- *उत्तर प्रदेश*
3- शीर्षक- *बच कर रहना यार*
*************************
रक्तबीज कोरोना से
बच कर रहना यार,
है बहुत ही घातक यह
छुप कर करता वार।
छुप कर करता वार
भीड़ है इसका वाहक,
चंद रोज रुक जाओ घर में
बाहर निकलो ना नाहक।

हाथ मिलाना बंद कर
दूर से ही प्रणाम करो,
बार-बार हाथ है धोना
प्रतिदिन तुम स्नान करो।
प्रतिदिन तुम स्नान करो
स्वच्छता बहुत ही रखना,
हट जाये पथ छोड़
निकट ना आये कोरोना।

लाखों जीवन ग्रास बनाकर
सकल विश्व दहला दिया,
क्रूरता की सारी हदें तोड़
कहर कैसा बरपा दिया।
कहर कैसा बरपा दिया
अभी भी बढ़ता जाये,
कहाँ से आया काल
कोई कुछ समझ ना पाये।

मानव अपना द्वेष छोड़
मानवता के पथ कदम बढ़ा,
हे ज्ञानी!अभिमान त्याग कर
खुद बच,सुन्दर धरा बचा।
खुद बच, सुन्दर धरा बचा
फिर अब ना आये कोरोना,
रख धीरज अंदर यार
भाग जायेगा कोरोना।
-अवधेश कुमार वर्मा 'कुमार'







_____________02____________

1. रचनाकार- *बालाराम भाटी 'नागाणा'*
2. राज्य- *राजस्थान*
3. शीर्षक- *कोरोना से बचना हैं*
***********************
मानव को मजबूत बनाकर, भारत का जयगान करें।
जाति-धर्म की तोड़ दीवारें, आओ हम अभियान करें।।1।।

बच्चे,बूढ़े,जवान को,बात यही समझाना हैं। 
कोरोना के कहर से,जल्दी छुटकारा पाना हैं।।2।।

गांव-गांव और शहर-शहर में, घर-घर जन अभियान करें।
अपने पराये की बात छोड़कर, आओ हम बयान करें।।3।।

सरकारी सुझाव मानो, यही समय की रचना है।
अपनी बुद्धि-विवेक-ज्ञान से, कोरोना से बचना है।।4।।

सुख-चैन की नींद छोड़कर, कर्मवीर दिन-रात खड़े।
कोरोना से लड़ने खातिर,शोध करे वो बड़े-बड़े।।5।।

मंदिर-मस्जिद बन्द पड़े है, खुले नहीं है हवाई जाल।
मानव सेवार्थ खुले पड़े है,सब जगह के अस्पताल।।6।।

रोग कोरोना बड़ा भयंकर, लेता है मानव की जान।
घर में रहना,सुरक्षित रहना,यही है इसका निदान।।7।।

देश की महती गरिमा को, मिलकर आगे लाना हैं।
कोरोना महामारी से, मानव जाति को बचाना हैं।।8।।

फैलने नहीं देंगे कोरोना, शपथ सहित ऐलान करें।
जाति-धर्म की तोड़ दीवारें, घर बैठे अभियान करें।।9।।

कोरोना को हराने का,जागरूकता अभियान करें।
मानवता की सेवा खातिर,भाटी बालू बखान करे।।10।।
-बालाराम भाटी 'नागाणा'





_____________03______________
*०१. रचनाकार का नाम-* कुमार जितेन्द्र "जीत" 
*०२. राज्य-* राजस्थान 
*०३. शीर्षक-* कर्म से कोरोना 

रचना-  कर्म से कोरोना


          हें! मानव, 

कैसा कर्म कर लिया तुमने, 

कोरोना को जन्म देकर l 

त्राहिम- त्राहिम मचाया तुमने, 

कोरोना को फैलाकर ll 

           हें! मानव, 

प्रकृति को भूल कर, 

तोड़ी तुमने मर्यादा l 

मार पड़ी जब प्रकृति की, 

तो हो गया हक्का - बक्का ll

       हें! मानव, 

तुम हल्के में नहीं लेवे, 

कोरोना की महामारी को l 

इटली और चाइना की तबाही, 

देख रोके नहीं रुकती ll 

          हें! मानव, 

कैसा कर्म कर लिया तुमने, 

कोरोना को जन्म देकर l 

त्राहिम- त्राहिम मचाया तुमने, 

कोरोना को फैलाकर ll 

          हें! मानव, 

बच्चे, बूढ़े और बेघर का,

 तुम्हें रखना है ख्याल l 

सभी रहें अपने घर, 

कोरोना का हैं ईलाज ll 

          हें! मानव, 

नहीं होवे जनहानि, 

कोरोना की महामारी से l 

अफवाहों को न फैलाएं, 

अफवाहें हैं बड़ा वायरस ll         

            हें! मानव, 

कैसा कर्म कर लिया तुमने, 

कोरोना को जन्म देकर l 

त्राहिम- त्राहिम मचाया तुमने, 

कोरोना को फैलाकर ll 

      हें! मानव, 

संबंधो में थी दूरिया, 

पहले से ही गहरी l 

कोरोना के वायरस से, 

गहरी हो गई और दूरिया ll 

        हें! मानव, 

स्वच्छता और एकांतपन है, 

कोरोना का बचाव l 

समय नहीं है घबराने का, 

सतर्कता का दे सुझाव ll 

         हें! मानव, 

कैसा कर्म कर लिया तुमने, 

कोरोना को जन्म देकर l 

त्राहिम- त्राहिम मचाया तुमने, 

कोरोना को फैलाकर ll

कुमार जितेन्द्र "जीत"






_____________04______________ 


*रचनाकार का नाम*-गौरव सिंह घाणेराव
*राज्य*-राजस्थान
*शीर्षक-* हार जायेगा कोरोना

*रचना*

*हार जायेगा कोरोना*

राक्षशो का देश बना चीन,दया बिलकुल भी करी ना
सुख,चैन देखो गया छीन,जैसी करी वैसी ही भरी ना
निर्दयी बन जिन्दे जीव खाये,अक्ल भी घास चरी ना
खुद तो डूबा कोरोना से पर दुनिया भी पूरी डरी ना

ऐसी फैली महामारी,भूल गए लोग थारी मारी
चीन-इटली में मरने की जैसे होड़ मची है बारी बारी
पाँव कुल्हाड़ी मार आप ही विनाश की शुरु की तैयारी
आप बचावन सब चाहे अरु भूल गए लोग दुनियादारी

जैसा काम करे हो भैया,वैसा ही तो अब भरोना
प्रकृति से खिलवाड़ करते फिर क्यों न फैले कोरोना
खालो सौगंध गलती हुई,आगे से जीवो को चरोना
हाथ मिलाने से गुरेज करो,बस अभिवादन नमस्ते करोना

दवा इसकी न बन पाई है,बस बचाव ही उपचार है
सर्दी-जुखाम,बुखार,सिरदर्द,इसके ये लक्षण चार है
मुँह ढको,और चश्मा पहनो,हाथ धोने बार बार है
महामारी फैली ऐसी है जिसके आगे विश्व लाचार है

बच्चों को बाहर ना भेजो,भेजो न मेले,बाजार
आप भी भीड़ भड़क्के से तौबा करलो इस बार
तुलसी,अदरक,लौंग,शहद का करलो काढ़ा तैयार
इम्युनिटी बढ़ा लो अपनी यही है इसका उपचार
ध्यान रखो अपना,अपनों का कमर कस लो तुम यार
सजग हम सबको रहना है,तब कोरोना जायेगा हार

_गौरव सिंह घाणेराव





_____________05______________ 



नाम :- अभय चौरे हरदा
राज्य:- म.प्र. 
स्वरचित रचना शीर्षक :- कोरोना
      कोरोना
कोरोना बिमारी बनी महामारी
जग को सारे हिला दिया
इसके घेरे में जो भी आया
यमलोक उसको पहुचा दिया।।
जाति धर्म भेदभाव न देखा
सबको एक सा सिला दिया
कोई भी इससे बच ना पाया
सबको इसने हरा दिया ।।
कोई भी युक्ती काम ना आई
निर्बल सबको इसने बना दिया 
कुदरत का विनाश किया इन्सा ने
इसका परिणाम उसने बता दिया।।
समझ सको तो समझो प्यारे
फिल्म का ट्रेलर दिखा दिया
अब ना समझे तो मिट जाओगे
समझने का तुम्हे मौका दिया।।
कुदरत के संग जीना सीखो
संदेश दे सबको जगा दिया
पेड़ लगाओ जल को बचाओ
सादा जीवन सबको सिखा दिया।।
कोई कुदरत से बच न पाया
जिसने भी इसको दगा दिया
विकास करो कुदरत के साथ
सबको इसने ये सिखा दिया।।
धरती को तुम हरा बनाओ
जल संरक्षण का संदेश दिया
कुदरत संग विकास करो तुम
अच्छे से ये हमको समझा दिया।।
        अभय चौरे हरदा
           






_____________06______________ 



रचनाकार का नाम -जय श्री तिवारी
राज्य-मध्य प्रदेश
विषय-कोरोना
विषय-कोरोना पश्चात परिवर्तन

कोरोना तेरे लॉकडाउन में, बहुत परिवर्तन किया अपने में ।
आध्यात्मिकता ,योग, प्राणायाम को जीवन का अभिन्न अंग बनाएंगे ।
संग्रह की वृत्ति से ज्यादा दान देने की प्रवृत्ति अपनाएंगे।
बहुत  जी लिये संसार की दौड़ भाग में, खुद में खोकर खुदा और खुद को पाएंगे।
भौतिक विकास से ज्यादा ,आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देंगे।
प्रकृति का बहुत अधिक दोहन कर चुके हैं, उसके पास बैठ कर बातें करेंगे।
प्रकृति ने जो हमें दिया उस पर ज्ञान मंथन कर उसके विनाश एवं प्रदूषण को रोकेंगे ।
बनावट और कृत्रिमता को छोड़कर, मौलिकता में जीना सीखेंगे ।
अंदर और बाहर एक जैसे होकर दुनिया को खूबसूरत बनाएंगे ।
समय-समय पर उत्सव करके उत्सवों की पाठशाला खोलेंगे ।
वसुधैव कुटुंबकम की भावना प्रबल कर, भारत को विश्व गुरु बनाएंगे।
         नाम  -जय श्री तिवारी




_____________07______________

रचनाकार का नाम - बुद्घि प्रकाश महावर 'मन'
राज्य- राजस्थान
शीर्षक- जिस कोरोना के डर से (गीत विधा)
        
जिस कोरोना के डर से, घबराई दुनिया सारी है।
डॉक्टर ही है ईश्वर अब तो, संकट सब पर भारी है

जहाँ बन्द है देवालय और देवों के मठाधीश।
झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र, ढोंगी के सब आशीष।
जान हथेली पर लेकर खुद, करते रक्षा हमारी है।

ना हाथों में हाथ देना, ना ही गले से लगाना।
स्वच्छता का है रखना ध्यान, सबको है जगाना।
मुँह को ढ़क कर आगे बढ़ना, कैसे फैले बीमारी है।

हौसला रखना खुद और दूसरों को देना।
दूरियां बनाकर रखना, जीवाणु मत लेना।
सावधानी से ही अब तक हम सब से ये हारी हैं।

जुकाम खाँसी और बुखार सिर में दर्द हो कोई।
कोरोना के लक्षण है ये, देख के दुनिया रोई।
तुरंत चिकित्सालय जाओ तब,कैसी सोच विचारी है।

धन्य-धन्य है डॉक्टर सारे, धन्य है उनकी माई।
ईश्वर को ना देखा "मन" ने, तुमने जान बचाई।
शत-शत वंदन और अभिनंदन करती दुनिया सारी है।

           
                  बुद्धि प्रकाश महावर "मन"
   






_____________08___________
 रचनाकार - संदीप सिंधवाल
राज्य - रुद्रप्रयाग उत्तराखंड 
विषय - कोरोना 

आशा का दिया - कुंडलियां
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।।१।।
राजा मन व्यथित होत, उपजे एक विचार
जला दिया  देहरी  पे, दूर  कीजे  विकार।
दूर  कीजे  विकार,  दुखी पड़ा जहां सारा
उम्मीदों की लौ ही, दिलाता एक  सहारा।
दूर रह 'सिंधवाल',पास किसी के न आजा
सहयोग सबका हो,इक जो क्या करे राजा।।
।।२।।
जहां  जगमगाएगा, जब  होवे रात्रि  नवम्
प्रकाश के विश्वास से,मिट जाता सब भ्रम।
मिट जाता सब भ्रम,दिखता राहों उजाला
विपदा की जंग में, त्याग दीजे सब भाला।
बैर मिटा 'सिंधवा'ल', बैर का अब वक्त कहां
यारी भी  जिएगी, दूरी  राखी vहो  जहां।।
।।३।।
दिया के उजाले से,आस्था का होत सृजन।
अंधमय वाटों में, मिल जाते कहीं भगवन्।।
मिल जाते कहीं भगवन्,बस एक ही चेतना।
महामारी न हो कभी, जग नाहि सहे वेदना।।
कहे 'सिंधवाल' मित्र,सजगता बिन कौन जिया
होंसला राखे मन, जला के आस का दिया।।

संदीप सिंधवाल








_____________09______________



 रचनाकार का नाम - महेश गुप्ता जौनपुरी
राज्य - उत्तर प्रदेश
शिर्षक - कोरोना

छूपल रहा डुकल रहा घरवा में ये भाई
दसे पांच दिन में भाग जाई कोरोना ये भाई

भईया ये भौजी नन्हका गदेलवा सुनी
घरवा में डुकी के कोरोना से लड़ी
चच्चा ये चाची बड़का बाऊ के समझाई
माई बाबू तनी एक मीटर के दुरी बनाई

बहिनी तनी तई जीजा के समझाई
जीजा घरवा से बाहर ना जावे पाई
सेनेटाइजर से घरे दुआरे करी छिड़काई
कोरोना कोरोना बा खतरनाक लड़ाई

सब काम कजवा के छोड़ी बईठी घरवा में
दसे पांच दिन बिताली परिवार के संगवा में
ई कोरोना बड़का महामारी भईल बा
लोगन में गजबे डर समां गईल बा

बार बार आपन हाथ साबुन से धोई
केहू से भईया अब हाथ ना मिलाई
हाथ जोड़ के नमस्ते क पाठ पढ़ाई
गले लगाकर भाईचारा में रोग ना फैलाई

खांसी जुकाम सरर्दी के ना समझी एलर्जी
घरवा में बैठ के ना करी आपन मर्जी
झट पट डाक्टर से चिकित्सिय परिक्षण कराई
कोरोना के शुरूआती लक्षण के दूर भगाई

छूपल रहा डुकल रहा घरवा में ये भाई
दसे पांच दिन में भाग जाई कोरोना ये भाई

       महेश गुप्ता जौनपुरी




____________10______________
: रचनाकार का नाम-प्रकाश
राज्य-दिल्ली
विषय-करोना

शीर्षक -करोना कारण एवं बचाव.... 

चीन ने ऐसी विपदा उत्पन्न करी,
हुई पूरी दुनिया बेहाल।

अब क्या करें WHO,
जब हुआ इटली का बुरा हाल।

वुहान शहर से आया दानव,
विश्व में इसने कोहराम मचाया।

हाय! देखो चीन ने जैसे,
किया हो कोई जादू  टोना।

पूरा विश्व बोल रहा है , 
करोना-करोना।

करो तुम जीवो से प्यार,
तभी ना होगा ऐसा विनाश।

अब तक जिन्हें कैद किया,
जिन‌ पर किया अत्याचार।

आज वो ले रहे है ,
अपना इंतकाम।

जो कल तक थे ,
अपने  कर्मों से अंजान।

जब तक रहेंगे घरों में आप,
तब तक होगा करोना से बचाव।

आओ लगाए मुंह पर मास्क
तभी बचेंगे हमारे प्राण।

हाथों में है जान तुम्हारी,
हाथों को तुम साफ ही रखना।

बाहर मौत का दानव बैठा,
घर में सबको साथ ही रखना।


प्रकाश( दिल्ली)






____________11______________
रचनाकार का नाम :- मदन मोहन शर्मा 'सजल'
शहर/राज्य :- कोटा (राजस्थान)
विषय :- कोरोना
*विधाता छंद*
★★★★★★★★★★★★
कभी देखा नहीं मंजर, बगावत आम जनता से,
तड़फ़ कर रोज का मरना, करोना की सितमता से,

हुए लाचार सब साधन, करे तो क्या करे मांझी,
खुदा भी सो रहा घर में, करोना की गरलता से,

नजारा मौत का तांडव, मचा दुनियां के' शहरों में,
बचे हैं वह भी' दहशत में, छुपे घर में सरलता से,

लगाते दोष आपस में, मचाते शोर संकट का,
समझ कर भी नहीं समझे, ख़ताओं की चपलता से,

नहीं ईश्वर कहीं दोषी, गलत है दोष ठहराना,
'सजल' हम ही गुनहगारा, रहे होते समरता से।
★★★★★★★★★★★★
मदन मोहन शर्मा 'सजल' - कोटा (राजस्थान)




____________12_____________

 रचनाकार-- संजय कु. मिश्र"अणु"
राज्य;-बिहार.
शिर्षक--कोरोना.

कोरोना का रोना! 
--------------------
      (कविता)
----------------------------------------
       बंद करो-
      ये कोरोना का रोना!! 
      ये तो तय हीं था-
      एक दिन होना!! 
अरे ओ आततायी-
मुझे सीखा रहे हो क्यों?
आज हाथ-मुंह धोना!! 
बंद करो ये-
कोरोना का रोना!!
   खा गये मांस पी गये खुन, 
   कतरा-कतरा चाट गये भ्रुण! 
   कभी दया भी नहीं आई तुम्हे, 
   चित्कार सुन करूण!! 
  जब खुद पर सामत आई-
  अपना शीर धुना !!
   बंद करो ये-
   कोरोना का रोना!!
दीन,हीन,लाचारों पर-
करते रहे प्रहार! 
मारते रहे हो बेवजह-
बम,गोली और तलवार! 
भूल से भी स्वीकारा नहीं-
ऐसा नहीं चाहिए होना!!
बंद करो ये-
कोरोना का रोना!!
    छोडकर प्यार और दुलार-
    करते रहे हो नरसंहार! 
    आज वही पीडा हो गई है-
    हरेक के उपर सवार! 
   और अब नहीं चाहते हो-
   प्राणअपना  खोना!!
   बंद करो ये-
    कोरोना का रोना!!
हरेक की पीडा का जब खुद में, 
आत्मसात हो जाय! 
अभी से भी सोंच लो बस-
बिगडी भली बात हो जाय!!
सीख लो अभी से भी तुम-
गले लगाकर छुना!!
बंद करो ये-
कोरोना का रोना!!
        कुछ नहीं कर पायेगी ये-
       विश्व विनाशक कोरोना!!
      बेकार है कोरोना का रोना, 
      हाथ-पैर धोना!! 
      जब कभी जरुरी हो छुना-
      लगाकर गले प्रेम से छुना!!
      बंद करो ये-
      कोरोना का रोना!!
        ---:भारतका एक ब्राह्मण.
       संजय कुमार मिश्र"अणु"



____________13_____________



: ०१.रचनाकार का नाम-सुधीर देशपांडे
०२. राज्य- मध्यप्रदेश
०३. शीर्षक-

कौन कहता है कि
हो युद्ध तो
लडेंग सैनिक ही
और सीमाओं
को चाक चौबंद रखने
का काम होगा
उन्हीं के बूते,

कि जरूरत होगी ही नहीं
हथियारों की 
कि लड लेंगे हम यह लडाई
घर पर रहकर ही
बिना उतरे मैंदानों में,

कि संवेदनाएं खोखली हो 
जाएंगी
जब अपना ही कोई
तडपता दम तोडता होगा
पर आंसू और पश्चाताप
दोनों की साथ होंगे

अपनों के जीवन की कीमत पर
देगा कौन कंधा भला
और लाशें
उठाई जाएंगी किसी
वाहन से
और बिना किसी मंत्रोच्चार
फूंक दी जाएंगी
या
बिना फातिहे
दफना दी जाएगी

कि शत्रु रहेगा
अदृश्य हवा की मानिंद
कि आ धमकेगा
हमारे भीतर सांस या
स्पर्श के सहारे,

कि क्षण में होंगे सब अपने
वे जो रहेंगे
दूर और
पास आकर नजदीकियां
जताने वाला दुश्मन होगा

युद्ध होगा तो
होंगे सभी सैनिक
चाहे वे हों हथियारों से लैस
या निहत्थे

होंगे एक,
दूर रहकर भी
कहेंगे
सभी के सम्मिलित
प्रयासों से
जीता जा सकेगा यह युद्ध
घर में रहकर ही।
बडा अजीब होगा यह कहना भी
कि लडा गया था
एक युद्ध ऐसा भी।

सुधीर देशपांडे




____________14_____________ 

रचनाकार — रामकुमार यादव
राज्य ———बिहार

शीर्षक ——वैश्विक महामारी

मानव जीवन अनमोल है।
इतना रखना ध्यान ।

बुढ़े बच्चे और जवान ।
छेड़ो कोरोना से बचने का अभियान।

लॉकडाउन का पालन कर ।
जीवन को करें सुरक्षित ।

कोरोना रुपी महामारी को।
सहज समझना ठीक नहीं।

सरकारी आदेशों का भी। अवहेलना करना ठीक नहीं।

यह महामारी खतरनाक बिमारी।
बढ़ती जाये छुआ-छुत से।

दिन- दोपहर चौपहर-रात।
ऐसे बढ़ना ठीक नहीं।

जीवन है अनमोल भाई।
जीवन की परिभाषा समझो।

लाभ - हानि का चिंता छोड़ो।
जीवन है अनमोल ये समझो।


      रामकुमार यादव








____________15_____________ 


 रचनाकार का नाम - डॉ सुनील कुमार परीट
राज्य - कर्नाटक
विषय - कोरोना

शीर्षक-- मिलकर कदम बढ़ाना होगा

मिलकर कदम बढ़ाना होगा
कोरोना के विरुद्ध लड़ना होगा ।
तेज खासी बुखार लगता हो
तुरंत डॉक्टर को दिखाना होगा  ॥

मिलकर कदम बढ़ाना होगा
एक दूसरे को सचेत करना होगा ।
हाथ न मिलाओ गले न लगाओ
सख्त नियम पालन करना होगा ॥

मिलकर कदम बढ़ाना होगा
अनुशासन के साथ चलना होगा ।
यारों हिम्मत से काम लेना होगा
कोरोना को अब मिटाना होगा ॥

मिलकर कदम बढ़ाना होगा
डॉक्टर पुलिस कोरोना के योध्दा  
उनके दिखाये राह पर चलना होगा
अब उनको सलाम करना होगा ॥

छोड राम रहिम कोरोना के
योध्दाओं को सलाम करना होगा ॥

डॉ. सुनील कुमार परीट





____________16_____________


रचनाकार का नाम--वीरेन्द्र कुमार साहू 
राज्य --छत्तीसगढ़ 
विषय। --कोरोना
       
               ❄️❄️ कोरोना❄️❄️
               ---------------------------------
हर सदी में फैली एक महामारी
इस बार आयी कोरोना की बारी
              है भयानक रूप इसका
            नाम मे ही है रोना जिसका
बच के रहने की कर लो तैयारी 
मानव की करनी प्रकृति पे भारी
         बनाये हैं तूने बम एटम कई हथियार
            सब विनाश के साधन तेरे
 प्रकृति की एक अंगड़ाई 
मानव हुआ बेबस न कोई राह समझ आयी
     बना ले दूरी मास्क हाथ धोने का कर ले जतन
   ताकी बचा रहे ये तेरा मानव जीवन !!

  
   --वीरेन्द्र कुमार साहू





____________17_____________



रचनाकार का नाम*... डॉ. नरेश कुमार "सागर"
*राज्य*... उत्तर प्रदेश
*विषय* .....कोरोना
*विधा*..... गीत
=====   *गीत*
*टिकने ना देंगे हम हिंदुस्तान में*
===========

कोरोना के  कह दिया है कान में
 टिकने ना देंगे हम हिंदुस्तान में 
 चीन डोल या जा तू पाकिस्तान में 
*टिकनें ना देंगे हम  हिंदुस्तान में*

 डर- डर के ना काम कोई हम करते हैं
 विपदाओं से हंसकर हम तो लड़ते हैं
 हिम्मत बहुत बची है अपनी जान में 
*टिकनें ना देंगे हम हिंदुस्तान में*

 भाईचारा  तोड़ ना अपना पाएगा 
तू भी  आखिर कब तक यूं लड़ पाएगा
 ढूंढ ही लेंगे बसा तू जिसकी जान में
 *टिकनें ना देंगे हम हिंदुस्तान में*

 तेरे खातिर घर से ना निकलेंगे हम
 ये ना समझना तुझसे बहुत डरते हैं हम
 फैंक देंगे  तुझको पीक दान में
 *टिकनें ना देंगे हम हिंदुस्तान में*

 तुझको गरूर तेरा ही खा जाएगा
 भाग कोरोना गीत तू  रो -रो गाएगा
 दफना देंगे तुझको हम श्मशान में
 *टिकने ना देंगे हम हिंदुस्तान में*

 कुछ दिन और बाहर निकलना भारी है
 जंग हमारी तुझसे घर से जारी है
 घुसनें ना  देंगे हम तुझे मकान में
 *टिकनें ना देंगे हम हिंदुस्तान में* 

आओ मिलकर ढूंढें कुछ हल इसके
काट फैंकदो उड़ने वाले पर इसके
 फिर से खिलेंगे गुल "सागर" गुलदान में
 *टिकनें ना देंगे हम हिंदुस्तान में*
========
डॉ.नरेश कुमार "सागर"






___________18_____________



 रचनाकार का नाम ...दीपमाला पांडेय
राज्य ....मध्य प्रदेश
विषय ....कोरोना

बन गया है जीवन का यह सार
 कोरोना का करना है संहार 
जन-जन को यह समझाना होगा
 तन की दूरी कुछ समय तक बढ़ाना होगा ....
साबुन सैनिटाइजर का होगा प्रहार
 तभी सुरक्षित रहेगा हमारा परिवार
 संकुचित मानसिकता पर करो विचार 
करोना कर रहा तुमको 
दुर्बल और बीमार ..….….. 
पूरे विश्व में लाना है खुशियों की बहार
 दानव रूपी कोरोना का मिलकर करना है संहार
 मुंह पर मास्क स्वच्छता को करो स्वीकार
 अदृश्य शत्रु का सामना करो ना मानो हार.....
घर बाहर सबसे अच्छा रखो व्यवहार 
जागरूकता के लिए बचाव का करो प्रचार
खुद को ना समझो बेबस और लाचार
कर्फ्यू और लाकडाउन को आज करोगे स्वीकार
कल फिर होगा हमारा देश खुशियों से गुलजार.....

          दीपमाला पांडेय




___________19_____________
 वैष्णो खत्री 'वेदिका'
जबलपुर (मध्य प्रदेश)

कोरोना से बचाव

कोरोना से सब बचे यहाँ
में हरदम वंदना करता हूँ।
मेरा सपना सच हो यहाँ
कोरोना को दूर भगाता हूँ।

पशु, पक्षी से दया करते सभी,
यही सबको सिखाया जाता है।
अद्वैतवाद को मानते यहाँ,
इस संस्कृति से गहरा नाता है।
स्वच्छता को अपनाकर यहाँ,
कोरोना को भगाया जाता है।
मैं भारत का रहने वाला हूँ।
कोरोना को दूर भगाता हूँ।

तुलसी, लोंग, कोलक सदा,
दालचीनी की चाय पीता हूँ।
पपीता पत्र का रस पीकर,
गिलोय वटी को चबाता हूँ।
नमस्कार माने सारी दुनिया,
आपको भी वही सिखाता हूँ।
भारत का रहने वाला हूँ।
कोरोना को दूर भगाता हूँ।


कोरोना का संक्रमण हो यदि,
आँख, नाक, मुँह को छूना नहीं।
कभी भी आ जाए खाँसी यदि,
हाथ का इस्तेमाल करना नहीं।
कभी बाहर हों तो फेस मास्क, 
दालचीनी, कपूर सुरक्षा दे यहाँ
भारत का रहने वाला हूँ।
कोरोना को दूर भगाता हूँ।

वैष्णो खत्री 'वेदिका'




___________20_____________


 नाम-गीतांजली वार्ष्णेय ।         राज्य-उ.प्रदेश।        जिला-बरेली।  शीर्षक- प्रार्थना(ए मालिक तेरे वंदे हम)
************************
 ए मालिक कोरोना के मारे  हम,
तेरे हों रहमों करम,
हाथ जोड़ चलें,दूरी बना के चले
ताकि कोरोना से बचके रहे हम।

ये वायरस चला आ रहा,
ये इंसान को खा रहा,
हो रहा घर में कैद,
कुछ न सूझे मगर,
है तेरी रोशनी में जो दम
तू करदे कोरोना को खतम।।
ए मालिक.............

हम घर में रहें,न बाहर निकले
गले मिलने को करदें मना,
हर घड़ी हाथ धोएं हम
तेरा आभार करते रहें हम

हाथ जोड़ चले,दूरी बना के चले
ए मालिक*************।

है परेशान अमेरिका और इटली
लेगा कितनी जानें अभी
है धैर्य धरा,प्रधानमंत्री की सुन लो जरा,
लॉक डाउन का पालन करें हम
तेरी कृपा से जंग जीतेंगे हम।

हाथ जोड़ चलें,दूरी बना के चलें
ए मालिक.........…........।।
गीतांजली वार्ष्णेय





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 नाम- ज्योत्सना कुशवाहा
राज्य- छत्तीसगढ़
         
           विषय - कोरोना

शिर्षक- (अंहकारी मानव और रक्तबीज कोरोना)

प्रकृति को मैंने हरा दिया है
नियमों के इसके बदला है,
आज मैं मानव नहीं रहा
भगवान् का रूप मैंने धरा है।

अंहकार में मानव भगवान् से डरना छोड़ रहा था,
मानव ही मानव से अपना  रिश्ता तोड़ रहा था।

पशु- पक्षी अौर जीवों का निरंतर भक्षण बढ़ रहा था,
बुद्धिमान मानव ही प्रकृति के नियमों से खेल रहा था।

सह नहीं सकती मैं पीड़ा अब मानव के कुकर्मो का,
हुई क्रोधित प्रकृति बड़ी देख मानव का दानव रुप।

कहां उसने-रूको मानव दिखलाती हूं तुम्हें प्रलय,

धर उसने बिकराल रुप
रचा रक्तबीज कोरोना को,
मानव को ही दिया परमाणु बमों का रूप,                                 मानव का ही अस्तित्व मिटाने ने को।

देख प्रकृति का रूप प्रलय, भयभीत हो रहा मानव हृदय,
कूड़े करकट की भांति,
मिट रही मानव जाति,
आठो पहर लगी रहती चिंता अबकी जलेगी किसकी चिता।

क्या अब भी समझ नहीं हमको?देखकर प्रक‌ति का प्रलय !

नाश किया है हमने सुन्दर सजग सृष्टि का,
अभी समय है थोड़ा शेष,
 सही मार्ग पर चलने का।

अपना लें हम मानवता का पथ,
दें सभी को एक समान जीने का हक़ ,
तभी होगा हम सब का कल्याण,
रहेगी प्रकृति भी खुशहाल ।।

      ज्योत्सना कुशवाहा








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नाम अनामिका रोहिल्ला
विषय  कोरोना
राज्य  दिल्ली


शीर्षक:
देश के पहरेदार

जी रहे हैं डाक्टर
मानसिक तनाव में।
डरे नहीं डटे हुए हैं
कोरोना के मैदान में।।

डाक्टर और परिचारिका
कर रहे हैं सब जतन।
जिंदगी सबकी बची रहे
सुरक्षित रहे अपना वतन।।

पुलिसिंग सोशल बन रही है
कोरोना को भगाने के लिए।
हम भी आपसे कह रहें है
सोशल डिस्टेन्सिग अपनाने के लिए।।

लैब टेक्नीशियन कर रहें
 देखो रैपिड टेस्ट।
कोरोना से बचने के लिए
यही तरीका सबसे बेस्ट।।

पीएम सब को दे रहे
जनता को संदेश।
जागृत जनता बनी रहे
कोरोना भागे विदेश।।

हम सब को भी देना चाहिए
पीएम जी का साथ।
कोरोना को भगाने के लिए
कर ले दो - दो हाथ।।

अनामिका रोहिल्ला 







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रचनाकार का नाम ~ रुपेश कुमार
राज्य ~ बिहार
विषय ~ कोरोना
शीर्षक ~ 
~~ कोरोना से डरना क्या ? ~~

कोरोना से डरना क्या ?
सुरक्षा , सफ़ाई, स्वयं का ख्याल रखना ,
समाजिक दुरी बनाकर रखना ,
समाज को जागरुक करना ,

कोरोना से डरना क्या ?
लॉक डाउन मे रहना हमें ,
सबसे नही मिलना हमें ,
रिस्तों से दुरी बनाना बनाना हमें ,

कोरोना से डरना क्या ?
पूरी दुनिया को साथ मिलकर लड़ना ,
जीवन मे कभी हिम्मत ना हारना ,
सभी को साथ मिलकर संघर्ष करना ,

कोरोना से डरना क्या ,
मौत तो एक बहाना हैं ,
जीवन मे डरना नही ,
हमेशा हाथ , मुह सफ़ाई करना ,

कोरोना से डरना क्या ?
हमेशा डॉक्टर, नर्स, सेना का साथ निभाना ,
सबको दिल से दुआयें देना ,
इन्हें हमेशा साथ देना ,

कोरोना से डरना क्या ?
जीवन मे देश- दुनिया को ,
भारत की संस्कृति अपनाना हमें ,
सबको हाथ जोड़कर नमस्ते, प्रणाम करना ,

कोरोना से डरना क्या ?
हमेशा संयम, अनुशासन मे रहना हमें ,
साथ - साथ समाज, दुनिया को रास्ता दिखना ,
अपने परिवार को समय देना ,

कोरोना से डरना क्या ?







___________24_____________

नाम-धनंजय सिते(राही)
विषय-लाॅकडाउन
राज्य-मध्यप्रदेश
"""'''''''""""""""""""""""""""""""""""
*घर एक मंदीर*
°°°°°°°°°°°°°°°
सब घर मे ही जमे हूए है-काम सभी के थमे हूए है!
साथ साथ है भोजन करते-कभी पुडी कभी खिर!!
*घर बना मंदीर*
बंद पडे है स्कुल बच्चो के-कई काम अटके अच्छो के!
एक अधिर बाहर घुमने को-दुसरा देता धिर!!
*घर एक मंदीर*
दुध किराना पुरष लाते-जंग जितकर घर मे आते!
बच पुलिस से आते जाते-कोई न जाने पिर!!
*घर ही है मंदीर*
सुख दुख मे सब साथ है देते-समस्या का समाधान खोजते!
एक बुलावे हो जाते-है सब के सब हाजिर!!
*यही तो है मंदीर*
पुजा पाठ मे बढत हूई है-घर की गृहिणी शेफ बनी है!
लगातार किचन मे दिखती-बनी हूई वह स्थिर!!
*यही होता मंदीर*
चार सदस्य हो जिस घरमे-एक टिवी तिन व्यस्त मोबाईल मे!
चारो बैठे है सोफे पर-ले थंडी हवा और निर!!
*यही होता मंदीर*
महाभारत रामायण देखते-ईश्वर को नतमस्तक होते!
बिपदा से अब तुम्ही बचाओ-हो अवतार लो हाजिर!!
*यही होता मंदीर-घर बना मंदीर*
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रचनाकार-- *जितेन्द्र हमदर्द* 
राज्य--उत्तर प्रदेश
विषय--कोरोना


शीर्षक--कोरोना से भयमुक्त रहे।

मत डर भयरहित साहस दिखा।
खुद को प्रचण्ड हीम्मत सीखा।

कोरोना का रुप बड़ा विकराल है।
तेरा धैर्य,विश्वास इसका काल है।

चतुर है वह भेद भाव नही करता।
अमीर गरीब किसी से नही डरता।

उस से डरो नही उसे ही भेद देंगे।
बस कुछ दिन और उसे खेद देंगे।

समय बलवान समय रुख बदलेगा।
एक दिन कोरोना देश से निकेलगा।

हौसला रखो परिस्थियाँ प्रतिकूल है।
हराने की हम में ताकत अनुकूल है।

ना जाने कितनी जिंदगी खा गया है।
कितनो को बिना कन्धे के रखा गया है।

मात नही खाई कोरोना से जंग जारी है।
धरती का ईश्वर कर चुका पूरी तैयारी है।

साथ देना होगा कोरोना योद्धाओं का।
यह समय नही रहा प्रतिस्पर्धाओं का।

सक्रिय रखे मन तन और उम्मीदों को।
बेजुबान भूखे जीवित रखे परिदों को।

समय शेष रहा जीत हमारी पक्की है।
घर पर सतर्क रहें,देश की तरक्की है।

बने *हमदर्द* गरीबों के हम ,भूखे ना रहे।
भरे पेट इस विपदा में भी चहरे रुखे ना रहे

जितेन्द्र"हमदर्द"




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1.नाम = भूपेंद्र काले
2.राज्य= इंदौर {M. P.}
3.शीर्षक = कोरोना

रचना =

कोरोना आया सबको डराया,
ईश्वर बनने वालों को फिर से इंसान बनाया | |

भीड़ में ये घेर के मारे |
अकेले ही  रह लो  प्यारे | |

जो इसको मारने दोढ़ा,
उसको मृत्यु धाम पहुंचाया |
लेकिन जो छुप गया,
उसने ही जीवन पाया | |

डॉक्टर, पुलिस, सफाई कर्मी,
 बन गए हीरो  |
इन सबको करलो सलाम मेरे देश के विरों | |

यदि  कोरोना घर आया तो,
तन- मन- धन से लूटेगा,
यदि नही गए घर से बाहर,
तो ख़ुद ही मिटेगा | |

आज सफाई ओर एकांत पर,
रख लो अपना ध्यान |
हमारे इस त्याग से ही
भारत बनेगा महान | |

घर वालों  के साथ शहर वालों को भी कहो |
जितना भी हो सके घर में ही रहो, घर में ही रहो | |

*भूपेंद्र काले *





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 नाम -अरुण गुप्ता 
राज्य -उत्तर प्रदेश 
विषय -कोरोना 

शीर्षक -कोरोना से परिवर्तन 

कोरोना तूने क्या गज़ब कर डाला 
घूमते थे जो दिन रात सड़को पर 
उन्हें एक घर में बंद कर डाला 

तूने तो नदियों को स्वच्छ कर दिया 
जो नहीं कर पायी सरकारे करोड़ो खर्च कर 
तूने वो मुफ्त में काम कर दिया 

हवाएं भी इतनी स्वच्छ हो गयी 
प्रदूषण की तो कोई बात ही नहीं 
पब, रेस्टोरेंट सब बंद हो गए 
आज परिवार के लोग संग हो  गए 

तूने पढ़ने का तरीका बदल दिया 
माँ बाप डाँटते थे जिन्हे मोबाइल छूने पर  
आज तूने उन  बच्चे के हाथ मोबाइल दिया 
कोरोना तूने बहुत कुछ बदल दिया 

जो छोड़ गए थे गाँव  अपना, यह कह कर 
काम ही नहीं है यहाँ, क्या होगा यहाँ रह कर 
वो आज अपने गाँव आने के लिए तरस रहे 
कुछ बसों से तो कुछ मिलों चल कर 
अपने गाँव पहुँच रहे 

जो कहते थे बिना शराब के एक पल नहीं जी पायेंगे 
वो आज बिना शराब के इतने दिन जिन्दा रहे 

जो दिन में हज़ारो खर्च कर देते, 
उन्हें पता चला वास्तव में कोई खर्च है ही नहीं 
रोटी ही चाहिये सभी को, बाकी सब दिखावा  
इससे ज़्यादा कुछ और नहीं 
उड़ा देते थे लाखो एक शादी में,
 शादी तो आज भी हुई, लेकिन लाखो खर्च नहीं 

कोरोना तुमने एक शिक्षक की भूमिका निभाई 
पता चला ऐसे भी जिया जा सकता है भाई 
इस मुसीबत के समय कई दानवीर से मिलाया 
किसी ने अपनी जान गवा कर अपना फ़र्ज़ निभाया 
कोई दिन रात खड़ा हो कर लोगो को समझाया 
कोरोना तेरे आने से बहुत परिवर्तन है आया 


By-अरुण गुप्ता





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 रचनाकार का नाम-: रमेश कुमार सिंह रुद्र
राज्य-:  कैमूर,बिहार
विषय-:  कोरोना 
शीर्षक-: कोरोना जागरूकता
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कोरोना से रोना नहीं,सामना करेंगे सभी,
हौसला बुलंद कर,सभी जन लड़ना।
सामाजिक दूरी बना,घर बाजार रहेंगे,
जनहित सोच रख,दुआ सब करना।
बारम्बार हाथ धोंवे,साबून सेनेटाइजर,
घरपर रखकर, अच्छाई से रहना।
लाक डाउन न तोड़ें, कोई साहस न छोड़ें, 
अपने आस-पास में,दम-जोश भरना॥१॥
रुप विकराल कर,महामारी आ गई है,
दिशाओं में अपना वो,तांडव मचा रही।
आम-जन-खास-तक,नहीं पहचान रही,
अपनी ऊंगली पर,सभी को नचा रही।
खांसी साथ सर्दी लिए,दर्द व बुखार लिए,
संक्रमित रुप ऐसी,हवा वो चला रही।
दूरी बनाकर रहें,एक-दूसरे से सभी,
तभी-तय-बच-पाना,यही वो बता रही॥२॥
  _______________रमेश कुमार सिंह रुद्र




___________29_____________
 रचनाकार, कमलकिशोर ताम्रकार 
राज्य, छत्तीसगढ़ 
विषय, कोरोना
शिर्षक,   कोरोना  तन्हाई

दिन की तन्हाई, रात की तन्हाई
चौदह दिन का , यह तन्हाई
इन्सोलेन्ट रहना, बडी दुखदाई
करवट बदले, नींद न आई

पत्नि से कहा, जोर से
आई          लव         यू
तपाक से जवाब मिला
सोशल................डिस्टेंस
मुह.........मे...........मास्क
बार..बार......धो........हाथ
टच  नही  करना.....आप
घर से बाहर निकलने का
यही है पश्चाताप

काटने लगी,रात तन्हाई
तन्हाई का साथी, फोन आई
दर्द मेरा, समझ लो भाई
दया करो ,कोरोना माई
जल्दी विदाई ,करो भाई
कैसे बीते, रात तन्हाई

यह रचना सत्य घटना पर आधारित है.

कमलकिशोर ताम्रकार




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 नाम-  नसीबुल हक नसीब
राज्य- बिहार
विषय- *कोरोना*
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कोरोना को हराना है कोरोना को भगाना है 
कुछ दिन और घर में ही समय अपना बिताना है
ना बाहर हम कभी निकलें ना बाहर तुम कभी निकलो
 भीड़ में जाने से बचना यही सब को बताना है
 कोरोना को भगाना है............. 
हमेशा हाथ साबुन से हमें धोते ही रहना है 
लगालो मास्क चेहरे पर अगर कहीं भी जाना है
कोरोना को भगाना है..............
 हजारों लोग अपनी जाँ गवां बैठे कोरोना से
अपने मुल्क में इसको पनपने से बचाना है
कोरोना को भगाना है.............. 
करोना का हो लक्षण तो परीक्षण तुम करा लेना 
ना डरना है कभी इससे ना औरों को डराना है
कोरोना को भगाना है.............. 
कोई भूखा न सो जाए हमें यह देखना होगा
जो हैं मजबूर उनको भी हमें जाकर खिलाना है
कोरोना को भगाना है.............. 
रहेगी जान बाकी तो मिलेंगे फिर से हम 'नसीब' 
है कुछ दिन की यह तन्हाई फिर तो हंसना हंसाना है
कोरोना को भगाना है..............

         *नसीबुल हक 'नसीब'*







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1.रचनाकार - जीताराम मकवाना
2. राज्य - राजस्थान
3. शीर्षक - जीत की पुकार


       जीत की पुकार

मानव पर महामारी छाई,
देश हित की बारी आई,
लॉक डाउन से रुक गए राही,
बंद पड़ी है आवाजाही।

बाहर जाकर करना कांई,
चारों तरफ महामारी छाई,
घर में रुक जा समझदार सांई,
इसी में है अपनी भलाई।

बाहर से आये जो भी भाई,
क्वारंटाइन हो चौदह दिन तांई,
बार बार करो हाथ धुलाई,
इसी उपाय ने जान बचाई।

खांची, जुकाम या हो अंगड़ाई,
कोरोना के दे लक्षण दिखाई,
स्थानीय प्रशासन को दो बताई,
इसमें मत करना ढिलाई।

भारत करे भरपूर भलाई,
विश्व पटल पर विजन चलाई,
विदेशों में दवा पहुंचाई,
मानवता की राह दिखाई।।

अर्थवयवस्था पर आंच आई,
वित्तमंत्री सुधार ले आई,
उद्योगों में आस जगाई,
मजदूरों को राहत पहुंचाई।

केंद्र सरकार ने मुहिम चलाई,
राज्य सरकारों ने आगे बढ़ाई,
जिलाधीशों ने हिम्मत दिखाई,
कर्मचारियों ने अलख जगाई।

स्थानीय जनता आगे आई,
जागरूकता की जोत जलाई।
सामाजिक संगठन भी करे भलाई,
जरूरतमंदों को राहत पहुंचाई।

भामाशाहों ने मुहिम चलाई,
भूखा न सोए कोई भाई।
जीताराम  ने कलम चलाई,
जन जन तक पुकार पहुंचाई।।


जीताराम मकवाना




___________32_____________
 *नाम*- *कालिका प्रसाद सेमवाल*
*राज्य*- *उत्तराखणड*
*शीर्षक* *मुझे यों रिझाते रुलाते रहेंगे*
******************
तुम्हारे मिलन के मधुर क्षण सुहाने,
सदा ही मुझे याद आते रहेंगे।

यहाँ आज बन्धन बने जिन्दगी के,
सपन सब तुम्हारे नई बन्दगी के,
थिरकते हुए पास आना औ' जाना,
पुनः दूर जाकर मुझे नित बुलाना,
कभी रूठ जाना, कभी मुस्कुराना,
कभी दूर जाकर नयन को छिपाना,
तुम्हारी मधुर कल्पना के सपन,
जिन्दगी में प्रिय हम सजाते रहेंगे।

कभी गीत गाकर नयन को चलाना,
कभी  पास आकर पुनः भाग जाना,
कभी खिलखिलाकर हृदय को रिझाना,
कभी देख मौसम मनोहर सुहाना,
मचलते हुए  दूर जाकर बुलाना,
तुम्हारे विरह में सपन रोज डूबे,
मुझे यों रिझाते रूलाते रहेंगे।

कभी अंजनों से नयन को सजाना,
कभी कुन्तलों में चमेली खिलाना,
कभी लालिमा को अधर में मिलाना,
कभी रोरियों से लिलारी रचाना,
कभी एड़ियों में महावर लगाना,
कभी हर्ष में पांव नूपुर बजाना,
तुम्हारे ये साधन प्रिय, जिन्दगी,
मन रुलाते  हृदय को दुखाते रहेंगे।

कभी साथ संगिनी सहेली बुलाना,
कभी रूठने पर अकेले ही आना,
हृदय को दुखाकर पुनः लौट जाना,
कभी फिर हँसी में खुशी का मिटाना,
कभी पास आकर अकेले चिढ़ाना,
कभी फिर रुलाकर नयन को मिलाना,
तुम्हारे रचाये गये खेल सारे,
नयन को रूलाते हँसाते रहेंगे।।
*****************








___________33_____________
 रचनाकार का नाम:-कमल कटारिया
राज्य:- राजस्थान
विषय:- कोरोना
 शीर्षक:- गुनाह

रचना:- 
ये दुनिया जानती है,
इस कोरोना की बाते।
हमारा खुदा जानता है,
मानव के इन गुनाहों की बाते।
छुपा न सकोगें तुम अपनी,
नजर से इन गुनाहों को।
समझोगे तुम कैसे इन,
बंजर धरा की बाते।
इबादत में ख़ुदा अगर नजर,
आएंगे जब तुमको।
रो-रो कर कहोगे तुम ,
अपने गुनाहों की बाते।
राम है, रहीम है,
कृष्ण, ख़ुदा और गुरु वाहे।
सभी धर्म व जाति है अपनी,
ये  तुम कहोगे फिर बाते।
हम सब मानव है हमे चलना है,
इस पावन मानवता के राहे।
इंसानियत धर्म है सबसे बढ़कर,
जाननी होगी तुम सबको ये बातें।
जमाना भी साथ देगा,
तब हम सभी का।
करेंगे हम सब इस, 
कोरोना को मिटाने की बातें।

-कमल कटारिया जोधपुर





___________34_____________
रचनाकार का नाम - आनन्द शुक्ला
राज्य - राजस्थान
विषय- कोरोना 
शीर्षक - अब तू ही बता तुजे क्या कहूँ।

अब तूही बता तुझे क्या कहूं
बीमारी कहूं कि बहार कहूं
पीड़ा कहूं कि त्यौहार कहूं
संतुलन कहूं कि संहार कहूं
अब तूही बता तुझे क्या कहूं

मानव जो उदंड था
पाप का प्रचंड था
सामर्थ का घमंड था
मानवता को कर रहा खंड खंड था

नदियां सारी त्रस्त थी
सड़के सारी व्यस्त थी
जंगलों में आग थी
हवाओं में राख थी

कोलाहल का स्वर था
खतरे में जीवो का घर था
चांद पर पहरे थे
वसुधा के दर्द बड़े गहरे थे

फिर अचानक तू आई
मृत्यु का खौफ लाई
संसार को डराया
विज्ञान भी घबराया

लोग यूं मरने लगे
खुद को घरों में भरने लगे
इच्छाओं को सीमित करने लगे
प्रकृति से डरने लगे

अब लोग सारे बंद हैं
नदिया स्वच्छंद हैं
हवाओं में सुगंध है
वनों में आनंद है
जीव सारे मस्त हैं
वातावरण भी स्वस्थ हैं
पक्षी स्वरों में गा रहे
तितलियां भी इतरा रही

अब तूही बता तुझे क्या कहूँ


                            ~ आनन्द शुक्ला




____________35_____________

रचनाकार का नाम- शेषा राम 
राज्य- राजस्थान 
विषय - कोरोना
शीर्षक - करो तुम उनका साथ 

रचना-
उठो, जागो देशवासियों
करो तुम उनका साथ
जो कोरोना भगाने में
बढ़ा रहे हाथ में हाथ।

महामारी भारत में आ गई
पैर पसारे दिन-रात
अब दशा खराब ना हो
देनी होगी इसको मात
यह काम वे लोग करेंगे
करो तुम उनका साथ
जो कोरोना भगाने में
बढ़ा रहे हाथ में हाथ

डॉक्टर शिक्षक सिपाई मिल
संक्रमितों को करें ज्ञात
अगर कोरोना क़ाबू ना हुआ
हो जाएगी काली रात
शुभ सवेरा वे लोग करेंगे
करो तुम उनका साथ
जो कोरोना भगाने में
बढ़ा रहे हाथ में हाथ

 बाहर नहीं भीड़ नहीं
शासन का देना साथ
जो कोई संदिग्ध लगे
प्रशासन से करो बात
सही इंतजाम वे लोग करेंगे
करो तुम उनका साथ
जो कोरोना भगाने में
बढ़ा रहे हाथ में हाथ
    
- शेषा राम




____________36_____________
 

रचनाकार:- प्रेमशंकर प्रसाद "करेला"
पता:- धौलपुर (राजस्थान)
विषय:- कोरोना
शीर्षक:- बचाव हेतु संदेश

रचना:- 

धीरज रख तू फिर से मोहब्बत का पैगाम आएगा
खिलेगा गुलशन, फिर खुशी वाला माहौल छाएगा
हम सब सुरक्षित रहेगें इस जग में ऐ नादान परिंदे,
अगर तू बेवजह पैर घर से बाहर नहीं निकालेगा। 

चारों तरफ एक ही भंयकर सी तस्वीर छायी है
बचने की तुमको कोरोना वॉरियर दे रहे दुआईं है
सम्मान करो इनका पत्थर ना मारो तुम साहब,
नियमों की करे जो अवहेलना वह उसकी बेशर्माई है। 

छोड़ो तुम कच्चा मांस, शाकाहार को अपना लो ना
हाथ मिलाना नहीं जरूरी नमस्कार कर लो ना
करे प्रण हम ना टूटने देंगे मोदी जी की कभी आस,
आओ हम सब मिलकर इस कोरोना को हरा लो ना

जो है धन के अमीर, अब जरा मन के धनी हो जाए
निभाए जिम्मेदारी, कोई पड़ोस में भूखा ना सो जाए
कमल,साईकिल,हाथ,हाथी सब को रखे एक तरफ,
प्रेम कहे करे बचाव, हंसते हंसते जिंदगी कट जाए। 

 प्रेमशंकर प्रसाद "करेला"




____________37_____________

नाम:           डांँ मीना श्रीवास्तव 
शहर/राज्य :   ग्वालियर /मध्यप्रदेश
विषय /शीर्षक: कोरोना का कहर



चहुंओर कहर कोरोना का पसर गया
जीवन जन-मानस का हाय डोल गया
घर से ना निकलें, लगी पांव में बेडियां
बंद हो गए देखिए हर द्वार-खिडकियां

हाट  - बाजार  की रौनक गायब हुई
मेले  - ठेले अनंत खुसिया गायब हुई
रंग-बिरंगी दौडती गाडियां गायब हुई
राह पर चौकियां निर्मित निरंतर हुई

घर - संसार की लुट गई मुस्कुराहटे
छा गई दिहाड़ी कीआँखो में घबराहटे
मंहगाई-अस्थिरता का हुआ बोलबाला
चिकित्सक की शोभा  गले के आला

बन गई गले की फांसी यह महामारी
विन्धवंश हो गई पूर्व व्यवस्था हमारी
राज्य सीमाओं की हो गई नाकाबंदी
छिपकर निकलने वाले बन रहे बंदी

चिकित्सक,प्रशासन व देश का मान्
रक्षक बन कर रहे लोक हित के काम
मास्क-हस्त सुरक्षा वस्त्र बन गए अस्त्र
जन -गण की रक्षा का अब यही है मंत्र
 
 चिकित्सक - प्रशासनिक अधिकारी
 पा रहे पुष्प - वर्षा  से  सम्मान भारी
 गंगा -यमुना की पावन - निर्मल धारा
रासायनिक अवशेषों से मुक्त हुई धारा

शिव शिरोमणि दमक रही स्वच्छ गंगा
यमुना हुई स्वच्छ ,पाया रूप समगंगा
रासायनिक - भौतिक  द्रव्यो से मुक्त
स्वतः हुई नदियां, स्वच्छता से  युक्त 

मदमस्त गज  हरिद्वार विचरण कर रहें
गंगा में  हरी की पौड ,डुबकी लगा रहें
 प्रदूषण से मुक्त हुआ यह वातावरण
पंख पसारे पंछी करें जल नभ विचरण

हे मानव तेरा प्रकृतिकर्म यह परिणाम
देख ले तू जी भर कर स्वकर्म अंजाम
हुआ तू बंद प्रकृति संग खिलवाड़ कर
सोच-समझ सत्संग ज्ञान सत्कर्म कर

*प्रो.  डाँ .मीना श्रीवास्तव*पुष्पांशी*






____________38_____________
 रचनाकार का नाम - रबाब
राज्य - मध्य प्रदेश
विषय - कोरोना
शीर्षक - *प्रतिशोध*

एक बात हुई खबर निराली,
जल और वायु की दोस्ती है पुरानी,
रोया जल और सुनाई अपनी कहानी,
इंसानों ने खूब की अपनी मनमानी,
फेका कूड़ा मुझमें बेहिसाब,
किया मेरा संतुलन खराब,
उठाया मेरा अत्यंत लाभ,
इसी बात से हूं मै उदास।।

सुन पीड़ा जल की वायु ने कहा,
ये दोस्त ना हो तू उदास,
देख चक्र कुछ यूं खुमेगा,
लेंगे हम भी *प्रतिशोध* इस बार।।

घुला हवा में *वायरस* ऐसा,
आज है हम सब लाचार,
कीमत हुई अब खबर हमें,
है प्रकृति के लाखों हम पर उपकार।।

नाराजगी में भी प्रकर्ती सीखा रही,
रखो सतयुग जैसी भावना ए इंसान,
पैसों की मोह माया छोड़,
करो अपनो से प्यार और सम्मान।।

है प्रकृति आरज़ू है अन्त यही,
क्षमा कर दो हमें इस बार,
करो दया हम पर और यूं,
खत्म हो प्रकोप *वायरस* का,
खुशियों और धन धान्य से भर जाए,
सभी का संसार।।

*रबाब*




____________39_____________

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, कोरिया,छत्तीसगढ़
शीर्षक_'कोरोना को भगाइए, कोरोना को भगाइए'

कोरोना को भगाइए, कोरोना को भगाइए.....

नोबेल कोरोना कॉविड 19 आज किसी परिचय का मोहताज नहीं
सभी पर हावी होता है ये
देखता किसी के सर का ताज नहीं
अमीर,गरीब, जाति, धर्म
 सभी को समान आंकता है
फैलाने को अपना संक्रमण
हर ओर ताकता है।
भीड़ भाड़ में इसके औजार
होते हैं प्रबल,
हांथ मिलाने, छिकने, खांसने
छूने से, इसका आक्रमण
होता है सबल।
मामूली सर्दी, खांसी और बुखार से कर देता है,सबका काम तमाम
ये है कार्य ,कोरोना का  आम ।

चलो करें पालन निर्देशों का
शासन के आदेशों का
घर पर रहना, तो सुरक्षित है रहना
समय समय पर, हांथों को
लगभग 20 सेकेंड तक धोना
प्रयोग करें साबुन या सेनेटाइजर
अवश्य लगाएं मास्क,
 जब जाना हो बाहर
एक मीटर की रखें,
 सामाजिक दूरी
चाहे खुशी हो या हो मज़बूरी।

स्वच्छता का रखें, विशेष ख्याल
खांसते/छिकते समय रखें
अपने मुंह में रुमाल।
गर लगे सर्दी, खांसी या बुखार
पहुंचें कराने त्वरित उपचार।

हां एक बात बहुत जरूरी
हो अफ़वाहों से कोशों दूरी
सतर्कता और सयंम से
जीतेंगे जंग कोरोना से।

लगे ऐसा कि आइसोलेट होना है
तो आइसोलेट हो जाइए
स्वयं के साथ, औरों के भी जान बचाइए
इंसान होने के नाते, इंसानियत का धर्म निभाइए
सब मिलकर नॉबेल कोरोना को हराइए
कोरोना योद्धा, निभा रहे अपना फर्ज
आप भी घर पर रहकर, अपना कर्तव्य निभाइए
कोरोना मुक्त भारत बनाइए
इस वैश्विक महामारी से,
अपने देश को बचाइए
कृपया इस संदेश पर मेरी
जरा गौर तो फरमाइए...
कोरोना को भगाइए, कोरोना को भगाइए।

          तारा पांडेय"मुक्तांशा"





____________40_____________

 रचनाकार का नाम-डॉ अरविंद श्रीवास्तव 'असीम '
राज्य-मध्यप्रदेश 
शीर्षक-कोरोना 
रचना-----
   *कविता* (कोरोना)
कौशल, गुण ,प्रतिभा, बुद्धि से                             अवनि पर खुशियां आयीं  ।
हुई सभ्यता विकसित पर
 मानव में कई कमियां  आयीं  ।
         भौतिकता के कारण जग में 
          प्रकृति से खिलवाड़ हुआ ।
           नदियां दूषित, वायु प्रदूषित
            स्वास्थ्य में बड़ा बिगाड़ हुआ ।
किसी देश की निष्ठुरता  से 
कोरोना बीमारी आई ।
लगता पूनम की रातों में 
मावस जैसे घिर आई ।
        *कोरोना है रक्तबीज* सम 
         संक्रामक  बढ़ती जाती ।
         मानव से मानव की दूरी 
         पर बीमारी  थम पाती।
ज्यूं  रक्तबीज को मार गिराने 
मां काली  भू पर आयीं ।
किया असुर संहार मात ने ,
तब जग में खुशियाँ छायीं ।
       वैसे ही सब देशवासियों ने 
        मिलकर यह ठाना है ।
       *कोरोना* को नष्ट करेंगे 
       लाॅक डाउन को अपनाना है ।
 *डॉ अरविंद श्रीवास्तव 'असीम '*




____________41_____________

 *रचनाकार का नाम*-अजय पटनायक
*राज्य*- छत्तीसगढ़
*विषय*-कोरोनो
 *शीर्षक*-कोरोनो पर  रोना नही
*रचना*-!
महामारी से काल मिला,चारों और अकाल मिला।
 भागदौड़ भरी जिंदगी में,शांत सुंदर चौपाल मिला।

अर्थव्यवस्था चूर मिला, मंदी भी मजबूर मिला।
कम बजट में जीना सीखा, बिन पहिए का चाल मिला।।

फसल खेत में सोता मिला,किसान घर में रोता मिला।।
 अन्न अर्थ के महत्व को जाना, सरकारी चावल और दाल मिला ।।

अपनों से दूरी मिला,छुआछूत और मजबूरी मिला।
 एकता और संस्कार जगे, दीपक से सजा थाल मिला।

 उद्योग सभी बंद मिला,मोटर गाड़ी प्रतिबंध मिला।
 खिलखिला उठी प्रकृति,प्रदूषण मुक्त निवाल मिला।।

 मजदूरों को भूख मिला,छीन गया काम दुख मिला।
 पलायन की विपदा दिखी,घर में सुखद हाल मिला।।

 लॉक डाउन का मार मिला,कानून का डंडा चार मिला ।
घर द्वार सब सुंदर हुए, एक साथ परिवार खुशहाल मिला।।

खेल छूटा शिक्षा से किनारा मिला, घर मे रहो ये नारा मिला।
कोरोनो पर रोना नही,बुरे  व्यसन को हड़ताल मिला।।


कवि अजय पटनायक





____________42_____________

रचनाकार का नाम-रोशन साहू
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-कोरोना
शीर्षक- हाथों में पत्थर न होना चाहिए
----------------------------------
फूल बरसना  था जिन हाथों से ।
उन हाथों में पत्थर  न होना चाहिए ।।

कृतज्ञता ही पहचान है आदमी की।
कृतघ्नता तो कभी भी न होना चाहिए।।

जीवन की सौगात लिए आए जो दर तेरे।
 कभी किसी को न गरल देना चाहिए।।

मसखरी नही ,न ही ये नादानियाँ है ऐ दोस्त।
गुस्ताखियाँ ऐसी  भी तो न होना चाहिए ।।

हिफाज़त के वास्ते बढ़े हाथों को ।
थाम लेना चाहिए ,न  काँट लेना चाहिए।।

दर के बाहर तेरे  जब खड़ी मौत हो।
लड़ लेना उससे ,अपनों से न झगड़ना चाहिए ।।

क्या हासिल तुझे ,ख्वाब गैरों के जो मुकम्मल  हों ?
रुसवाईयाँ भी ऐसी ,अपनो से न होना चाहिए।।

 धुँआ भी न पहुँचेगी, मकां उनके बहुत दूर है।
किसी के भी वास्ते ,न किसी का घर  जलाना चाहिए।।

हर दुआ में जिसके तू शामिल है रहा ।
उन्ही के रास्ते मे कांटे ,न यूँ बिछाना चाहिए।।
                                रोशन साहू






____________43_____________

 डॉ. प्रभा जैन "श्री", देहरादून 
प्रतियोगिता 
---------------
कोरोना 
---------------
कैसा यह पाठ 
कोरोना ने सिखाया, 
रखो मानव से 
मानव दूरी, बताया। 

चल  रहा लॉक डाउन 
एक इन्द्रिय जीव ने, 
डर -डर  कर रख रहे क़दम 
यह कौन सा पाठ पढ़ाया। 

हो गये फ़ासले 
इन्सा -इन्सा के बीच, 
पहने है मुँह पर मास्क 
धोते हाथ साबुन से बार-बार। 

किसी चीज का अंत 
होती कोई नई शुरुआत, 
बीज़ भी ज़मी में 
ले फ़ासला उगता। 

रहे सभी सुरक्षित 
रखें फ़ासले, 
सभी  है  घर पर, 
देख मन मेरा भी हर्षित। 

जल्दी हटेगा कोरोना 
और  यह फ़ासले, 
ख़ुशी से झूम- झूम गाये 
जैसे वर्षा में भीगी शाम। 

स्व रचित, मौलिक 
डॉ. प्रभा जैन "श्री "
देहरादून







____________44____________
रचनाकार - डॉ अलका पाण्डेय 
राज्य - महाराष्ट्र/ मुम्बई 
शीषर्क 
कोरोना से न घबराओ ....

“कोरोना से न घबराओ”

कोरोना से कोई न घबराओ रे 
कान्हा को याद करो संकट दूर करो रे !

राधे कृष्णा राधे कृष्णा बोल रे 
महामारी के तंतु को दूर भगा रे !

जीवन आंनदमय बना लो 
ईश्वर के गुणगान कर लो !

अपरम्पार महिमा है ईश्वर की 
सबको समझाओ बतलाओ !

राधे कृष्णा राधे कृष्णा बोलो रे 
ईश्वर से मुलाक़ात कर लो रे !

वृंदावन की पावन गलियाँ 
कान्हा के गीत गुनगुनाए  रे !

कोरोना से कोई न घबराओ रे 
कान्हा को याद करो संकट दूर करो रे !

राधे कृष्णा राधे कृष्णा बोल रे 
कलयुग  के पाप  सारे धो लो रे !

पापों की रही नहीं कोई सीमा 
अनाचार का ज़हर चढ़ रहा धीमा 

धर्म कर्म सब लोग भूले  गये रे 
ध्यान,योग, साधना भूल गये रे ! 

राधे कृष्णा राधे कृष्णा बोल रे 
प्राचीन परम्परा को अपना लो रे 

न आयेगी कोई महामारी देश में 
न कोई अकाल पड़ेगा देश में ! 

सत्कर्मों से जीवन सफल बनाओं 
सब मिलकर कोरोना को भगाओ

राधे कृष्णा राधे कृष्णा बोल रे
शींश झूका कर वंदन कर लो रे !

आओ जनता कर्फ़्यू का पालन करे 
हम सब मिल कर यह पुनीत कर्म करे !

सात्विक भोजन को अपनायें 
तामसी खाना छोड़े ,बिमारी दूर भगायें!

राधे कृष्णा राधे कृष्णा बोल रे
चहू और से प्रभु को पुकारो रे । 

कोरोना से कोई न घबराओ रे 
कान्हा को याद करो संकट दूर करो रे !

डॉ अलका पाण्डेय🌷🌷



____________45_____________
 रचानाकार-सीमा निगम
राज्य- छत्तीसगढ़


शीर्षक-" कोरोना को हराना  है "

रक्तबीज कोरोना महामारी की चर्चा चहुँओर है 
करोना संक्रमण से मुक्ति की चिंता चहुँओर है |
  
प्रकृति से छेड़छाड़ की सजा आज हमने पाई है
पशु पक्षी आजाद घूमते मानव पर विपदा आई है|

वक्त का तकाजा है प्रकृति से माफी मांगनी हैं
अपने किये भूल की आज भरपाई हमें करनी है|

खुद को सुरक्षित कर दूसरो को भी करना है 
कोरोना के लिए जन जन को जाग्रत करना है |

सामाजिक दूरी रख अपनी सुरक्षा जरूरी है 
बिना समवेत प्रयास के हर संकल्प अधूरी है |

वातावरण स्वच्छ कर लोगों का जान बचाना है
स्वच्छता अपनाकर भावी पीढ़ी को बचाना है |
 
 परीक्षा की घड़ी में नई जिन्दगी की आस है
 धैर्य रखकर हम ही जीतेंगें हमे पूरा विश्वास है |

भारत के हर घर में एकता का नवदीप जलाना हैं
दूरियां बनाकर स्वस्थ रहकर करोना को हराना है|

    
 सीमा निगम






____________46_____________
रचनाकार सुरेन्द्र हरडे कवि नागपुर महाराष्ट्र मोबाइल 9689467419
विषय   कोरोना त्रासदी

कोरोना ने  करता कहर ढाया है
सारे संसार को ताला लगाया है।
इंन्सान अपनी करनी सजा भुगत रहा है।
इंन्सान को अपनी जिदंगी पर 
बडा अंहकार था। जैसा कि वह अमरत्व का परवाना लेके आए
अहंकार रावण कंस दुर्याधन  का नहीं टिका अरे मानुष तु किस खेत की मूली ये।
कोरोना ने ऐसा कहर ढाया।
मानुष अपने ही घर खुद कैद हुआ।
भारत ने दिखा दिया सभ्यता , संस्कृति, मर्यादा एकता अनुशासन है इसका नतीजा कोरोना तु  नहीं टिक पायेगा।
आया जैसा चायना से वापस चले जाना ।
भारत विश्व अध्यात्मिक गुरु कहलाता यह भी सारे संसार ने माना कोरोनो का भगाने मंत्र भारत लिया दे
मदत करना भारतीय परंपरा संस्कृति है अमेरिका इटली सारे संसार को वायरस की खुले मन से दवाई दिया
हे भारत तु सारे संसार को दिखा दिया भारत तु महान है
कोरोना ने क्या कहर ढाया ।
सारे संसार को ताला लगाया

सुरेन्द्र हरडे कवि लघुकथा कार, 




____________47_____________

शीर्षक... कोरोना से तुम डरो ना... 
प्रो. चमन सिंह 
नाहन, हिमाचल प्रदेश l

कोरोना से तुम डरो ना 
डर कर यूं मरो ना 
मत निकलो घर से बाहर 
कुछ दिन धैर्य धरो ना...
सुरक्षित हो तुम अपने घर में 
घर से बाहर अभी जाना नहीं
कोरोना के बढ़ते खतरों पर
अफवाहें बिल्कुल फैलाना नहीं
हालात सुधर जाएंगे कुछ दिन में
हमें मिलकर आगे बढ़ना होगा
वैश्विक महामारी कोरोना से
एकजुट होकर लड़ना होगा
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना
साबुन से हाथ धोते रहना
लॉकडाउन का पालन करना
निशदिन गर्म पानी पीते रहना
दिशा निर्देशों का पालन करके 
हम यह जंग जीत कर दिखाएंगे
स्वस्थ रहकर घर में "चमन" 
हम कोरोना को दूर भगाएंगे ।

प्रो.चमन सिंह ठाकुर
नाहन हिमाचल प्रदेश






____________48_____________
डॉ.भावना एन. सावलिया 
राजकोट गुजरात
शीर्षक : कोरोना को जीत जायेंगे हम 
विधा : कविता

       कोरोना को जीत जायेंगे हम 

जीत जायेंगे हम, जीत जायेंगे हम,
चाहे कैसा हो कहर, जीत जायेंगे हम ।

चाहे कैसा हो तूफ़ान, चाहे कैसी हो डगर !
चाहे कैसी हो महामारी, चाहे कैसा हो जहर !
जीत जायेंगे हम,जीत जायेंगे हम......

घरों में बैठकर हम, कोरोना को हरायेंगे ,
हम दूर ही सही, दिल से साथ साथ चलेंगे ।
मन से कभी नहीं हारेंगे, हिम्मत से ही बढ़ेंगे ।
डटकर सामना करेंगे, हम पीछे नहीं हटेंगे ।।
जीत जायेंगे हम,जीत जायेंगे हम......

हम सामाजिक दूरियाँ की सावधानी रखेंगे ।
मास्क, स्वच्छता के साथ, देश को बचायेंगे ।  बिना समरांगण, बिना अस्त्र शस्त्र से लड़ेंगे। 
सभी तैनात कर्मियों का, हम साथ निभायेंगे ।।
जीत जायेंगे हम,जीत जायेंगे हम......

चेतना के दीप से ,मन का अंधेरा मिटायेंगे ।
आत्म श्रद्धा  लौ  से, जग उजियारा करेंगे ।।
प्रखर प्रकाश पुंज में,कोरोना का होम करेंगे ।
हिम्मत नहीं हारेंगे, हम धैर्य से बढ़ते रहेंगे ।
जीत जायेंगे हम,जीत जायेंगे हम......

प्रभु सा डोक्टर्स नहीं करते अपनी जान की परवाह ।
परिवार, बच्चों को छोड़कर, करते हैं कर्त्तव्य निर्वाह।
श्रृद्धा दीप नहीं डिगेगा, नयी उमंगे उड़ान भरेंगी ।
फिर से नंदनवन होगा,मन की चिड़िया चहकेगी।
जीत जायेंगे हम,जीत जायेंगे हम......

कोरोना को हरा देंगे, हम उसको भगा देंगे ।
हमारा धैर्य और आत्म विश्वास बरकरार रहेंगे ।
बच्चों की खुशियों के संग, जीवन बाग बाग होगा ।
स्वयं सेवकों के सम्मान संग, देश का जय जयकार होगा ।। 
जीत जायेंगे हम,जीत जायेंगे हम......

डॉ. भावना एन. सावलिया 
राजकोट गुजरात





____________49_____________
डॉ राजीव पाण्डेय
राज्य-उत्तर प्रदेश
शीर्षक-आशा के दीप जलायें
************************
घोर तिमिर के इस जंगल में,मंगल गीत सुनायें।
आशा के दीप जलायें।
शक्ति पुंज का उदघाटन है।
अपनी क्षमता का मापन है।
संयम धैर्य पराक्रम देता,
काल दूत को ये ज्ञापन है।
अंतर्निहित शक्तियों को हम, ये विस्वास दिलायें।
आशा के दीप जलायें।

क्रंदन वन में प्रेम जागरण।
सम्बल पाये यथा आचरण।
अकुलाहट को  भान कराये,
अनुभावों का मौन व्याकरण।
तीर्थधाम चौखट पर अपनी,नित अम्बर शीश झुकायें।
आशा के दीप जलायें।

प्रस्फुटन हो मौन शक्ति का।
नूतन जाग्रत नेह भक्ति का।
दूर क्षितिज तक खड़े शत्रु में
प्राकट्य हो उर आसक्ति का।
ज्योतिपुंज का देख प्रज्ज्वलन,रजनीकर भी सकुचायें।
आशा के दीप जलायें।

खड़गों  से सर्वत्र  विभाजन।
विवश भाव का है अनुपालन।
प्रेम अंकुरण  ही वसुधा  में,
प्रमुदित करते जीवन यापन।
दिव्य ज्योति के आल्हादन से,अन्तस का तमस मिटायें।
आशा के दीप जलायें।

डॉ राजीव पाण्डेय
गाजियाबाद





____________50_____________
 *रचनाकार का नाम- शिवेन्द्र मिश्र 'शिव'*
*राज्य- उत्तर प्रदेश*
*शीर्षक- कोरोना*
*विधा- कुंडलिया*
---------- *कोरोना* ----------
कोरोना  को  मानते, अति  साधारण  रोग।
भीड़ लगाकर कर रहे,असफल सभी प्रयोग।
असफल सभी प्रयोग, बताएं कुछ मजबूरी।
नही मानते लोग, न कायम रखते दूरी।
कहता 'शिव' दिव्यांग, पडेगा सबको रोना।
लापरवाही  यार,       बढा  देगी  कोरोना।01

साफ-सफाई से रखो, हरदम अपना ध्यान।
नहीं अंधविश्वास को, अपनाएं श्रीमान।
अपनाएं श्रीमान, कोरोना रोग है ऐसा।
दिखने में सामान्य, लगे सर्दी के जैसा।
कहता 'शिव' दिव्यांग, मिले न कोइ दवाई।
यही मात्र उपचार, रहे बस साफ - सफाई।।02

आया देखो चीन से,  कोरोना बन काल।
सकल विश्व के हो गये, हाल  बडे़ बद्हाल।
हाल  बडे़  बद्हाल, संक्रमण  की बीमारी।
हुआ भयानक रोग, बढी़  कितनी लाचारी।
असफल हुए प्रयोग, तोड़' ना अब तक पाया।
भगवन करो सहाय, रोग यह कैसा आया।।03

गोरी दरवाजे  खडी़, रोके पति  की  राह।
बाहर मत जाना  पिया, देती  यही सलाह।
देती  यही  सलाह,  दिखे  केवल  सन्नाटा।
कोरोना बन मौत,  कर  रहा  सैर- सपाटा।
कहता 'शिव' दिव्यांग,करे पिय संग बरजोरी।
जता रही है प्यार, सुघर सज धज कर गोरी। 04


*शिवेन्द्र मिश्र 'शिव'*






____________51_____________


नाम ...अनिता पाँचाल
राज्य... हरियाणा . गुरु ग्राम
विषय...कोरोना

कड़ी परिक्षा जीवन मे आई है 
आया दुख  का समय है भारी

हुआ भारत बन्द 
घर से बाहर जाना हुआ मना

माना मुश्कित है पर नामुमकिन नही 

 शायद बुराई मे भी
कुछ हो अच्छाई

हम इतने व्यस्त हो गए थे जीवन मे बस काम और काम 

व्यस्तता मे अपने आप और अपनो को चाह कर भी वक्त न दे पाते थे

अब सब भूल कर सोचे समय की किमत  को

अपना समय परिवार मे बिता खुशीयां बांटे हम

आओ कुछ करे कलाकारी
तकियो पर नई काशीदाकारी

नये पन्नों पर करे चित्रकारी
लूडो की खेले एक बारी 

अब तेरी फिर उसकी बारी
शतरंज की हो एक बाजी

नये व्यंजन का करे अविष्कार
वैसे भी आए  है त्योहार

कुछ मीठे के साथ हो जाए तीखा अपनी रसोई सजाए हम

आओ खुश हो समय
 बिताए हम 

सोचो हम सक्षम है जो एक वक्त रोटी रोज कमाते है  

उनका क्या होगा 
तो दुःख के समय संयम रखकर एक दूजे की मदद करे हम

घर में रह कर से सहयोग करे
साबुन पानी से हाथ धोंए बार 
बार







____________52_____________


रचनाकार का नाम: डॉ श्रीलता सुरेश
राज्य : कर्नाटक
विषय :कल्याणकारी आत्मा

निकली घर से बाजार थैला लें,
क्या देखा मैंने आश्चर्य से!
खड़े सैकड़ों रोगी कतार में
क्यों यहाँ खड़े मेरा मन प्रश्न से?  
विचित्र महात्मा है आए, रोगी बने निरोगी
कैसे हो संभव, जब विश्व में फैला यह युद्ध
दुश्मन है अदृश्य, जीते कैसे  उपाय न सूझे
रात-दिन मेहनत करें देश-विदेश को न बूझे 
कौन है यह आत्मा, जिज्ञासु से गई मैं मिलने
है एक बाबा बैठा, दिखे दिव्यता उनमें 
न कोई बंगला, न कोई आडंबर
श्वेतांबर धारण किए है बहुत अनोखा 
हाथ फेरते मानव पर, हो गए स्वस्थ!
रहे वैज्ञानिक, चिकित्सक अचंभित
बीमारी हो गायब, क्षण भर 
जो ज्ञान-पंडितों न करें महात्मा ने पाया
क्या जादू-टोना या माया? 
मैं खड़ी निहारतीं- है क्या रहस्य?
जान न पाई, महात्मा देख पुकारा मुझे 
वत्स- क्या शंका है तुझे?
निकट गई उस दिव्य आत्मा के 
कैसे यह संभव- जो पड़े-लिखे न कर पाए
उत्तर में – कल्याणकारी हूँ और सुनो ये युक्ति 
कोरोना  हो या रोगग्रस्त से मुक्ति 
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। 
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।“
इतनी देर सो रही हो? आवाज़ माँ की  
सुन घबरा कर उठ बैठी 
काश सपना सच होता। 
********  डॉ. श्रीलता सुरेश






____________53_____________

नाम-लता शर्मा
जांजगीर(छग)
विषय कोरोना
बदला प्रकृति का,,

हाहाकार मची है गांव-गांव शहर-शहर,
फैल रही है कोरोना वायरस का कहर।

प्रकृति अब ले रही है प्रतिशोध,
करवा रही है गलती का बोध।
ये कटते पेड़ उजड़ते जंगल,
किया जो तुमने प्रकृति से खेल।
खामियाजा भी भुगतो अब,
हुआ संतुलन उसीसे ड़ांवाडोल।।


कल कल निर्मल बहती नदी के,
स्वस्छ निर्झर शीतल जल को भी।
प्रदुषित किया सबने मिलकर,
बांधो से रोक लग गई प्रवाह पे।।

बिन मौसम बरसात हो रही है,
पंछी सोंच रहे हैं अब के सावन।
कहां बनाएंगे हम अपना नीड़,
नजर नहीं आता ठिकाना है।।

उजाड़ हो रहे हैं वन उपवन सभी,
प्रतीत होता ऐसे ,जैसे किसी।
शजर पर कहीं से है बिजली गिरी,
छुपा है इसी में प्रकृति का राज भी।।


सारी बातो का बस सार यही है,
हुआ है जो प्रकृति से खिलवाड़।
आज मानव अपनी ही करनी का,
परिणाम को ही तो भुगत रहा है।।

फिर भी अब सावधान रहना,
कोरोना से देश,शहर,गांव को,
हमको हर हाल में है बचाना,
पाठ सुरक्षा का लोगो को पढाना।

सुरक्षा अमला का सम्मान करना,
वही हैं धरती के भगवान अपना।
निज स्वार्थ को त्याग डटे हुए जो,
परवाह नहीं जिनको खुद अपना।।

घर में रहना सुरक्षित रहना,
काम हो कोई जरूरी टाले रखना।
हाथ जोड़ सबसे करती हूं विनती,
खुद बचना औरो को भी बचाना।।

लता शर्मा




____________54_____________
रचनाकार का नाम- आस्था पवार 
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - निवेदन (कोरोना के खिलाफ जंग)
------------ निवेदन ------------

जीवन की इस विकट स्थिती में,
 पृथ्वी की पुकार सुनो, 
आज स्थिति भयावह है,
यह जानने का उपकार करो कृतज्ञ भाव से कुछ करने का विचार करो ............,
रहता था जिन स्थलों में जमघट  कभी, 
दृष्टि ना हटती दिन कौतूहल से थी थमती थी ना ये धरती हमारी,
आज वही भयावश है वीरान पड़ी,
बिलख रहा है देश वह प्यारा, जिन पर है यह पहाड़ गिरे हे मेरे देशवासियों ! इन घटनाओं पर तो विचार करो,
 जीवन की विकट स्थिति में पृथ्वी की पुकार  सुनो... 
 है संकट में राज्य हमारा इस स्थिति में तो विनम्र बनो,
 बालपन का हठ त्याग कर,
ज्ञान मूर्ति का प्रतिबिंब  बनो,
निजी हित के मूल्यों को अपनाकर,
 राष्ट्रहित का तो सम्मान करो, भभक रहा है यह राष्ट्र दावाग्नी में, उस पर सूखे पत्ते का तो ना काम करो,
 हे मेरे मानव गण! मनु हितैषी बनने का उपकार करो
 हो रहा निष्ठ तेरे कार्यों से,
 हे मानव ! जन की हुंकार सुनो जीवन की इस विकट स्थिति में पृथ्वी की पुकार सुनो हो रहा अनिष्ट कार्यों से हे मानव !  जन की हुंकार सुनो....... 

=====आस्था पवार=====



____________55_____________
 रचनाकार का नाम,,, शिवशंकर तिवारी  
राज्य का नाम,,, छत्तीसगढ़  
विषय..... कोरोना  
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  
कहर टूटा करोने का, हुआ शमशान ये जीवन  
हवा ऐसी बही फिर हो गया वीरान ये मधुबन   
....................................... 
गिरी बिजली किसी दिल पे, हुआ जख्मी जिगर कोई  
सितम ढाये करोने ने, हुआ सुनसान ये उपवन  
.......................................  
कहीं दहशत का आलम तो, कहीं पे गमजदा मंजर  
कहीं गुमशुम बुढ़ापा है, कहीं हैरान ये बचपन  
......................................  
गली कूचे सड़क बाजार मेलों में है सन्नाटा  
कहीं मुझसे ही मेरी माँगता, पहचान ये दर्पण  
......................................   
कहें हाले जिगर किससे सुनायें दासताँ किसको    
पड़ोसी से कभी दूरी, कभी मेहमान से अनबन  
..................................... 
हुए बेनूर सूरज चाँद तारे ख्वाब जुगनू के  
किसी टूटे हुए दिल के लगे, अरमान ये अंजन  
......................................  
शिवशंकर तिवारी  ।
छत्तीसगढ़  । 



____________56_____________
 नाम- खुमान सिंह भाट
पता- रमतरा, बालोद,
 छत्तीसगढ़
शिर्षक- " कमाल कर दिया "
बिखरे परिवार को तूने
एकता कि माला से पिरो कर
घर की मर्यादा को तूने पल भर में ज्ञात करा दिया
समाजिक दुरी की महत्ता 
हम सबको बता दिया
वह ! रे कोरोना तुने कमाल कर दिया...
युवा पीढ़ी को मंदिरापान से दूर कर
निशा मुक्त समाज का मार्ग प्रशस्त कर दिया
वह! रे कोरोना तुने कमाल कर दिया...
मानव की बेवजह ईच्छाओ में पाबंद कर
जीवन निर्वाह हेतु आवश्यक
रोटी, कपड़ा और मकान की महत्ता हम सबको बतला दिया
वह! रे कोरोना तुने कमाल कर दिया...
अंधविश्वास भेदभाव घटा कर
विज्ञान चिकित्सा के प्रति विश्वास कायम कर दिया
धैर्यवान आपसी तालमेल
संतोष पूर्वक जीवन जीने की नई राह दिखा दिया
वह! रे कोरोना तुने कमाल कर दिया...
किसान ,सैनिक, चिकित्सकों के प्रति सम्मान का भाव जगा दिया
पडौस,सगा संबंधी आमजन में आपसी भाईचारे की भावना बढ़ा दिया
दानवीरता की भावना बढ़ा कर मानव में मानवता का भाव जगा दिया
वह! रे कोरोना तुने कमाल कर दिया...

~ खुमान सिंह भाट ~

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दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...