Wednesday, May 20, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- आलस्य का आशियाना

      रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
      जिला -कांकेर
      शीर्षक-*आलस्य का आशियाना*
       विषय-हास रस

    

*आलस्य का आशियाना*

'आलस्य का आशियाना' से
       बना लो अपना याराना,
जीवन फूलों से खिल उठेगा,
      मन होगा मस्ताना।

आलस्य का जग 
       बड़ा नाम है,
ना करना पड़ेगा काम
       ना होगी थकान।

आलसी लोगों के 
       संग लगाओ ध्यान,
सब समस्या का
          होगा समाधान।

जीवन सुरक्षित होगा 
       स्वर्ग में मिलेगा निर्वाण,
जग में आलस्य की पूजा होगी,
        युगों-युगों तक मिलेगा सम्मान।

न जाएंगे काम पर
      ,न होना पड़ेगा हलाकान,
ना कोई दुर्घटनाओं का डर ,
       ना मिलेगा फालतू मान।

घूमते-फिरते शान से 
        घर लौट आएंगे,
मम्मी, पापा का नाम
     उज्ज्वल कर बढाएंगे शान। 

बाबा,पापा की ढेरों दौलत,
         खोद खाएंगे खदान।
धीरे-धीरे दुनियाँ में ख्याति
          फैलेगी पूरे होंगे अरमान,।

हमारे रास्तों पर चलने
         वाले होंगे हमारे कद्रदान।
आलस्य का आशियाना
       से बना लो अपना याराना,
जीवन फूलों से खिल उठेगा,
         मन होगा मस्ताना।
व्याख्या-आलस्य के साथ संबंध बनाने से जीवन खिल उठेगा।आलस्य का दुनियाँ में बड़ा नाम है।इससे थकान भी नहीं होती।जीवन सुरक्षित रहता है,इन्ही भावों को लिए ये हास्य रस की कविता है जो वास्तविकता से परे है।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर( छ .ग.)

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