Wednesday, May 20, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना- अम्मट बासी

रचनाकार- अजय पटनायक
विषय-हास
शीर्षक- अम्मट बासी
विधा- मुक्तक
पता- रायगढ़,छत्तीसगढ़
       *अम्मट बासी* 

ये दादी में होगे, तोर बांसी के दीवानी गा।
सरपट सरपट तोर कवरा, अउ आमा के चानी गा....
ये दादी में होगे तोर बांसी के दीवानी गा।

पालथी मोड़ के खाबो दादी,
सब ला ललचाबो,
जमो झन देखत रिहि,
सुआ गीत ला गाबो।
अबर मीठ लागे दादी ,
एकर अम्मट पानी गा......
 ये दादी में होगे तोर बासी के दीवानी गा।

भूख के बेरा मा सुरता आये  मन ला ललचाए ।
बटकी भाड़ा ताकत रहिथो, कछु नहीं सुहाय।
इमली चटनी गोंदली बरी, अउ तोर कहानी गा.....
ये दादी में होगे तोर बासी के दीवानी गा।

 गर्मी महीना भोंभरा तिपे, 
किसे निकल के जाओ, कहां जाके बैठो दादी काकर संग मा खाओं।
आके मोला लेगजा दादी,
 हो गेयों  सियानी गा....
ये दादी में होंगे तोर बासी के दीवानी गा।

गिल्ली डंडा फुकडी खेलबो,
खेलबो भंवरा, बाटी गा।
पिंधहूँ लुगरा,फुदरा गजरा,
 अउ पिंधहूँ पैरी सांठी गा ।
बैला गाड़ी,बेलन चड़बो, पेरबो तेल के घानी गा....
ये दादी में होगें तोर बासी के दीवानी गा।।

तरिया तीर मा गरी खेलबो,
झोरी ला फन्दाबो,
खेत खार मा रांधबो दादी,
मिल बांट के खाबो,
 बिहा बर ला झंन सोंचबे , नई आए हे मोर जवानी गा....
ये दादी में होगे तोर बासी के दीवाने गा।

सांझा के बेरा, खोएल मा डेरा ,
भाथे मोरे गांव गा,
शहर मा झन जाबे दादी
सुख लागे पीपर छांव गा।
ते हावस मोर सुघर दादी, मैं तोर "परी" रानी गा....
 ये दादी में होंगे तोर बासी के दीवानी गा।
ये दादी मैं होंगे तोर बासी के दीवानी गा।।

मौलिक रचना
अजय पटनायक

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