स्थान___नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला_जांजगीर_चाम्पा
राज्य__छत्तीसगढ़
विधा---कविता मुक्तक
शीर्षक---गीतों में
व्याख्या____प्रस्तुत कविता में कवि गीत के माध्यम से गरीबों का प्रतीक लेकर सुबह-शाम, दान ,दया, कृपा ,इंसानियत आदि गुणों वाले व्यक्तियों को खोजने की बात की गई है ऐसे मनुष्यों के द्वारा ही समाज, देश, नागरिकों के लिए नेक कार्य किए जाते हैं ।
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गीतों में
गीतों में सुबह ढ़ूंढ़ू मैं ।
गीतों में शाम ढ़ूंढ़ू मैं ।
अगर मिल जाता है मुझको ।
सभी का कल्याण ढ़ूंढ़ू मैं ।
कोई है सामने अपना।
और वो रो रहा है ।
बस मन से सोचलो तुम।
ऐसा क्यों हो रहा है ।
गीतों में हंसी ढ़ूंढ़ू मैं।
गीतों में कृपा ढ़ूंढ़ू मैं ।
कोई सड़क पर है पड़ा ।
जिसका घर बार नहीं है ।
अस्मर्थ है बेचारा ।
कोई सहारा नहीं है ।
गीतों में मददगार ढ़ूंढ़ू मैं ।
गीतों में समझदार ढ़ूंढ़ू मैं ।
किसी के तन पे नहीं कपड़े ।
और खरीद भी नहीं सकता ।
आपकी ओर है निगाहें ।
कह भी नहीं सकता ।
गीतों में दान ढ़ूंढ़ू मैं ।
गीतों में इंसान ढ़ूंढ़ू मैं ।
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