जिला बेमेतरा (छ ग)
विधा कविता
शीर्षक नैतिक शिक्षा
कविता:-
नैतिक शिक्षा हमारे देश की शिक्षा
सारे विश्व ने सीखा हमसे ही।
नैतिक शिक्षा सीख कर देखो,
अग्रणी बन गए कई देश भी।
और उसी नैतिक शिक्षा का,
यह हाल है मेरे देश में।
पाश्चात्य शिक्षा फल फूल रहा है,
अब तो हमारे युवाओं के रोम रोम में।
आज सारा देश पाश्चात्य,
और हमारी पाठशाला भी।
अंग्रेजी शाला का जोर है,
अब तो देखो मेरे देश में भी।
अंग्रेजी शाला में पढ़ाना,
लोगों की है शान।
अंग्रेजी भाषा में बोलना,
लोगों की है अब आन बान और शान।
राष्ट्र भाषा और नैतिक शिक्षा छोड़कर,
अंग्रेजी के पीछे पड़ रहे लोग हैं।
अभी भी वक्त है नैतिक शिक्षा को,
अपना लो फिर से मेरे देश में।
नहीं तो फिर गुलाम बनेंगे,
अंग्रेजी भाषा के जोर से।
नैतिक शिक्षा हमारे देश की शिक्षा,
फिर से अपना लो मेरे देश में
....
भावार्थ:- नैतिक शिक्षा जो कि हमारी प्राचीन शिक्षा है आज वह भारत में शिक्षा से लुप्त होते जा रही हैं। यही कारण है कि हमारे युवा पाश्चात्य शिक्षा की ओर बढ़ रहे है और सारी युवा पीढ़ी पाश्चात्य मय हो रही हैं, जिसे रोकने के लिए हमे हमारी नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक हैं।
सूर्य प्रकाश पाटिल
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