Friday, May 22, 2020

छत्तीसगढ़ के मुंगेली से नागेश कश्यप की रचना

 रचनाकार का नाम:- नागेश कश्यप
जिले का नाम:- मुंगेली(छत्तीसगढ़) 
शीर्षक:- जिनगी के पैडगरी
विधा:- कविता

   जिनगी के पैडगरी

जिनगी के पैडगरी म संगी,
ऊबड़ खाबड़ रेंगे ल परही।
ऊँच निच अऊ डबरा डिलवा,
गिर गिर खुद संभलना परही।।

सुख के साथी बँहुते मिलही,
दुःख म दुरिहा छिदबिद होही।
तोर करम  के रोना  जँहुरिया,
अपन  आँखि म  कोन रोही।।
करम के दीया तोर अइसे बार,
सबो जगह ओला बरे ल परही।
जिनगी के..........रेंगे ल परही।।

झन सोच तैं, झन बिचार संगी,
जऊन  होना  हे ओही   होही ।
उप्पर वाले तोर जिनगी म एकदिन,
सुख के  बिजहा  खच्चित बोही ।
दुःख के आँसु कहूँ रोवत रइबो,
त फेर  धीरज  ल कोन  धरही।
जिनगी के..........रेंगे ल परही।।

भरम  के   बैरी   नदिया म,
मोह के डोंगा खेवत   हच।
छन्नी  म  तैं  दूध  दूहे अऊ,
करम  ल  दोष  देवत  हच।
अपन करम के भुगतना संगी,
हमला खुद  भुगतना परही।
जिनगी के..........रेंगे ल परही।।

का होगे तोर आघु म आज,
बिपत  के  अँधरी  छाये  हे।
कतको  मनखे  भरे  परे  हे,
जऊन दर दर ठोकर खाये हे।
बाँध के रखबे मन ल तँय हर,
त अँजोर ओला करे ल परही।
जिनगी के..........रेंगे ल परही।।



: व्याख्या-
 ये रचना म रचनाकार ये बताना चाहत हे के, जीवन रूपी रद्दा म डबरा डिलवा सुख दुख हानि लाभ ये जम्मो ल सह के रेंगे ल परथे, अउ तोर मेरन सुख के साधन अपार हे त तोला कतको संगवारी मिल जाही, अउ ओही संगवारी मन दुःख के बिपत के बेरा म तोर ले तिरिया जाथे..ये प्रकार ले जम्मो पंक्ति के भाव लिए रचना स्पष्टीकरण हे.।

2 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...