जिला ~ रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा ~ कविता (अनुप्रास अलंकार )
शीर्षक ~ *मोह-माया*
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हर कोई किसी की कल्पना में खोया है l
हर जन के जीवन में अपनी एक जान है l
चकोर - चाँद की चाह में चंचल हों तड़पता है l
नर -नारी के नेह में हर घड़ी नाच नाचता है l
सुमन - सुगंध की सुध में हर पल मुस्काती है l
भगवान - भक्त के भक्ति भाव में बह जाते है l
जल - जमीन अपनी जगह पर जमे हुए है l
सुख - समृद्धि के समय अपने साथ निभाते है l
दुख - दर्द के दबाव में सगे दग़ा दे जाते है l
पति - पत्नी के परवाह में प्रीत पनपते है l
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