स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---भजन
शीर्षक--- मोहन मनके इस मंदिर में
व्याख्या---- प्रस्तुत कविता में कवि के द्वारा मन रुपी मंदिर में निवास करने के लिए श्री कृष्ण से कहा गया साथ में बांसुरी, राधा ,ग्वाल बाल सखा,धेनु को भी लाने की प्रार्थना की गई है।
मन में ही वटवृक्ष, यमुना मधुवन की रचना करने को कहा गया है । साथ ही कोई निशाचर मिल जाने पर उसका वध करने को कहा गया है ।
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मोहन मनके इस मंदिर में (भजन)
मोहन मनके इस मंदिर में,करलो अपना वास ।
कोई और न आ जाए ,...इसका मुझको त्रास ।
राधा भी संग लेते आना, मुरली को तुम भूल न जाना ।
धेनु ग्वाल बाल भी संग रहेंगे,संग संग करना निवास ।
मन में ही तुम मुरली बजाना,मन में ही धेनु चराना ।
मन में कोई असुर मिल जाए, कर देना उसका नाश ।
मन में बट हो मन में यमुना, ......मन में हो मधुवन ।
श्याम घनश्याम मुरली मनोहर ,मन में हो मधुमास ।
मन को मेरा भटकने न देना,इधर उधर चलता है ।
मन को अपने निगाह में रखना,हरदम आस पास ।
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