पता:- रायगढ़,छत्तीसगढ़
विधा:- मुक्तक काव्य
शिर्षक:- बस इतना सा ख्वाब है
विषय:- रति,विनोद भाव मे रचना
कश्मीर की वादी हो, सारा जहां हो मस्ती में।
लहरों के किनारे घुमेंगे ,प्यार भरी कस्ती में।।
फूलों से भरा बाग हो,प्रियतम हमारे साथ हो। उसके जुल्फों की छांव में,प्यार की बरसात हो ।।
सुहाने मौसम में हो, एक लंबा सा सफर।
बाहों के आलिंगन में हो,मेरा हमसफ़र ।।
तुम्हारे गोद के आगोश में,एक गहरी नींद सो जाऊं।भूल जाऊं दुनिया, तुम्हारे प्यार में खो जाऊं ।।
जी करता है बाहों में तुम्हारी, जिंदगी गुजार दूं। भर के मांग में सिंदूर,तुम्हारी जिंदगी सवार दूं।।
फूलों की सेज पर हो, हर रात एक सुहागरात।
प्यार की निशानी दूंगा,एक सुंदर सपनो का सौगात।।
तेरा मेरा प्यार होगा, सुखी अपना परिवार होगा।
बस इतना सा ख्वाब है,तू ही मेरा संसार होगा।।
*मौलिक रचना*
अजय पटनायक
*शब्दार्थ* :- एक प्रेमी का अपने प्रेमिका के प्रति कल्पना का रेखांकन है, जो अपने ख्वाब से जिंदगी के खूबसूरत पहलुओं से रूबरू करा रहा है।
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