बैकुंठपुर, जिला _कोरिया
छत्तीसगढ़
विधा_कविता
अजीब सा रिश्ता, दोस्ती या प्यार?
बैठी नहीं सागर के किनारे
फिर भी लहरें नज़र आती हैं
हमारी दोस्ती दूरियों पर टिकी हैं
फिर भी गहराई नजर आती है।
कभी न गए साथ आपके,
मगर दिल का पंछी
विहार कर आ गया
देखी नहीं जी भरकर आपको
पर आपका चेहरा नजर आ गया।
मन तो करता है
आपको याद न करें
यहां तक कि फोन में
बात तक न करें
अनमोल समय, बर्बाद होता है
पर इस दिल का क्या करें?
जो हर वक़्त आपके पास होता है
दिल तो चाहता है
आप आएं और हम देखें आपको
मगर नजरों की चाहत कुछ और ही है
आपके आगमन की तमन्ना तो रखती हैं, मगर शरमा के झुक जाती हैं ये कह कर कि क्या करें यार समझ में नहीं आता कि
अजीब सा रिश्ता दोस्ती है या प्यार?
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
धन्यवाद
ReplyDelete👌👌👌👌soothing
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ReplyDeleteVery sweet poem👌👌👌👌👌
ReplyDeleteVery nice poem
ReplyDelete👌👌👌bahut h sunder kavita h
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