स्थान-खरसिया
जिला -रायगढ़
विधा- गीत
शीर्षक -तू मेरी जन्नत
व्याख्या-
नायक अपनी नायिका से अत्यंत स्नेह करता है। वह उसे मन्नत में मिलने वाली स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं समझता। हमराही, दिल की धड़कन, खुशियों का संसार का उपमा देता है। वह उसके प्यार का दीवाना है।
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कविता -तू मेरी जन्नत
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तू मेरी जन्नत, तू मेरी मन्नत
तू अनुपम मेरा प्यार है।
हमराही मेरे दिल की धड़कन,
तू खुशियों का संसार है।।
तेरे बिन न कटे न एक दिन,
पल-पल बीतते बड़े कठिन।
मत पूछो तुम विरह वेदना,
तन-मन होता है गमगीन ।।
आंखों में तुम, सांसों में तुम
तुमसे ही तो बहार है....।।
बसे सपनों और ख्यालों में,
मुहब्बत के हर सवालों में।
हूं दीवाना अजी मैं तुम्हारा,
और हूं बड़े दिलवालों में।।
यूं रहना तू मेरी बनकर,
तुमसे मेरा मनुहार है....।।
तू है तो खिला"गुलाब"बाग में,
नेह बरसे पत्थर और आग में,।
प्यार की ताकत रब है जानता,
टिका हुआ ये जग अनुराग में।।
हम सफ़र मेरी मंजिल तुम हो,
तेरे बिना जीना दुश्वार है...।।
प्यार तो जीवन का सार है,
प्यारजीवन का आधार है।
तेरे बिन जग सूना-सूना,
तेरे बिना तो सब बेकार है।
मुंह न मोड़ना मेरे दिलवर,
तू जीवन का खेवन हार है...।।
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