Saturday, May 16, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से गुलाब सिंह कंवर"गुलाब" की रचना- तू मेरी जन्नत

रचना कार-गुलाब सिंह कंवर"गुलाब"
स्थान-खरसिया
जिला -रायगढ़
विधा- गीत
शीर्षक -तू मेरी जन्नत

व्याख्या-
नायक अपनी नायिका से अत्यंत स्नेह करता है। वह उसे मन्नत में मिलने वाली स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं समझता। हमराही, दिल की धड़कन, खुशियों का संसार  का उपमा देता है। वह उसके प्यार का दीवाना है।
~~~~~~~~~~~~~~~~~
कविता -तू मेरी जन्नत
*****************
तू मेरी जन्नत, तू मेरी मन्नत
     तू अनुपम मेरा प्यार है।
हमराही मेरे दिल की धड़कन,
       तू खुशियों का संसार है।।

तेरे बिन न कटे न एक दिन,
 पल-पल बीतते बड़े कठिन।
मत पूछो तुम विरह वेदना,
तन-मन होता है गमगीन ।।
आंखों में तुम, सांसों में तुम
तुमसे ही तो बहार है....।।


बसे सपनों और ख्यालों में,
मुहब्बत के हर सवालों में।
हूं दीवाना अजी मैं तुम्हारा,
और हूं बड़े दिलवालों में।।
यूं रहना  तू मेरी  बनकर,
तुमसे मेरा मनुहार है....।।

तू है तो खिला"गुलाब"बाग में,
नेह बरसे पत्थर और आग में,।
प्यार की ताकत रब है जानता,
टिका हुआ ये जग अनुराग में।।
हम सफ़र मेरी मंजिल तुम हो,
तेरे बिना   जीना दुश्वार है...।।

प्यार तो जीवन का सार है,
 प्यारजीवन का आधार है।
तेरे बिन जग सूना-सूना,
तेरे बिना तो सब बेकार है।
मुंह न मोड़ना मेरे दिलवर,
तू  जीवन का खेवन हार है...।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...