Thursday, May 28, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से आनंद कुमार त्रिवेदी की रचना- जीवन


रचनाकारः आनंद कुमार त्रिवेदी
जिलाः रायगढ़
शीर्षकः  "जीवन "
विधाः छंद मुक्त 
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अपना-अपना नजरिया है,
अपनी-अपनी परिभाषाएँ।
जीवन तो कागज है कोरा,
जो जैसे चाहें  लिख जाएँ।।

मीरा के लिए प्रेम ही जीवन,
तो राणा के लिए संघर्ष।
भीष्म के लिए प्रतिज्ञा है,
रावण के लिए अहं उत्कर्ष।।

कुण्डलिनी जागृति योगी का जीवन,
गोपियों के लिए कृष्ण मिलन।
कामी के लिए वासना तृप्ति ,
भोगी के लिए है संग्रहन।।

कोई दुख संताप जनाए,
कोई सेवा ही जीवन बतलाए।
कोई परहित जीवन बिताए,
तो मोक्ष प्राप्ति कोई समझाए।।

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व्याख्या ः   जीवन एक जटिल और रहस्यमयी विषय है जिसको लोग अपने अपने दृष्टिकोण के मुताबिक परिभाषित करते हैं और तद्नुरूप ही जीते हैं।
जाकी रही भावना जैसी,
प्रभु मूरति देखहिं तिन तैसी।
   प्रस्तुत पद्य में यही संदेश दिया गया है।

आनंद कुमार त्रिवेदी

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