Thursday, May 28, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से गुलाब सिंह कंवर"गुलाब" की रचना- जीवन

रचना कार-गुलाब सिंह कंवर"गुलाब"
स्थान-खरसिया
जिला-रायगढ़
शीर्षक,-,"जीवन संघर्ष है"
विधा-कविता
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जीवन संघर्ष है"
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ग़म न कर हे पथिक, यह जीवन संघर्ष है।
लड़ लिया गर दिल लगाकर, तो होना उत्कर्ष है।
निराशा के बादल छंट जायेंगें एक दिन,
फिर जीवन में मंगल और हर्ष ही हर्ष है।।

सुख दुःख, जन्म,-मृत्यु तो आना ही है।
मानव को धरती में ये रस्म निभाना ही है।
परिवर्तन शील जीवन तो चिंता व्यर्थ है....।।
ग़म न कर हे पथिक यह जीवन संघर्ष है।।


हंसते हुए जीवन गुजारना तो होगा।
गलतियों को सारे सुधारना तो होगा। 
 हर पल को जीना यही जीवन का अर्थ है....।।
ग़म न कर हे पथिक जीवन संघर्ष है।

गिरते मनोबल से जीवन होता तबाह है।
टूटते दिल बिखरते अरमान, जिसके गवाह है 
हिम्मत से आगे बढ़ाना, सफलता की शर्त है...।।
ग़म न कर हे पथिक यह जीवन संघर्ष है।।


ग़म के दरिया में साथी, दर्द ही दर्द है।
पी लो दो घूंट भी तो ,अजी क्या हर्ज है।
उम्मीदों की सदा जलाए रखना चिराग, अर्ज है..।।
ग़म न कर हे पथिक, यह  जीवन संघर्ष है ।।
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--- गुलाब सिंह कंवर"गुलाब"
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जीवन संघर्ष है। सुख-दुःख तमाम झंझावातों से गुजरना पड़ता है। संयम से गम न करते हुए समस्याओं का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। एक दिन जरूर सफलता मिलती है
और सुख का दिन आता है।

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