राज्य - राजस्थान , अजमेर
शीर्षक - मजदूर
मजदूर
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हर चमकती वस्तु में
झिलमिलाता है मेरा पसीना
हर विलासिता में छुपा हुआ है
मेरा परिश्रम
ऊँची अट्टालिकाओं में
गढा हुआ हूँ में कही गहरा
दौड़ती गाड़ीओ ने
रोका है मुझे हर पल
आगे बढ़ने से
गाँवो और शहरों को
जोड़ने वाली सड़कों ने
तोड़ा है मुझे बार बार
मशीनों के शोर में
दब जाती है मेरी आवाज़
हर बार
थके हाथ खाली पेट
बोझ उठाते उठाते
जिंदगी खुद एक
बोझ बन जाती है
महलों की तामीर की खातिर
सड़कों पर सोने को
मजबूर हूँ
पर मुझे कोई शिकवा नही
इनमें भी लिपटी है
मेरे पसीने की खुश्बू
नींव का पत्थर हूँ मैं
मैं मजदूर हूँ
मैं मजदूर हूँ ।
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