Saturday, May 2, 2020

छत्तीसगढ़ से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- मजदूर

कवयित्री - रश्मि विपिन अग्निहोत्री
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक- मैं मजदूर हूँ! 

       *मैं मजदूर हूँ !*

मेरे कांधे पर विकास पलता है
मेरे कदमों से संसार चलता है....
गर टिका दूं एक पल हल तो
विकास रूक जाये.....
और गर मैं चाहूँ तो
नदियां मुड़ जाये....
सागर सूख जाये
आसमां झुक जाये.....
बनाता गगनचुंबी इमारतें
और झोपड़ी मेरा नसीब.....
सब उपजाता सबको देता
फिर भी कहाता गरीब.....
नदी नहरों को बहाता 
किन्तु खुद सूखा हाला ......
और आज दुहाई देखो !
मजदूर दिवस मेरा! 
सारा संसार मनाता....
काश यह मेरी दशा की खातिर
कोई नज़र उठती....
काश कोई बनता कानून
मेरे बच्चों की खातिर.....
कृपादृष्टि करते नेता 
न्याय देते मुझे ये शातिर....
मगर अफसोस " रश्मि "
मेरा श्रम बहायेंगे ये !
मजदूर दिवस मनायेंगे ये ! 
मजदूर दिवस मनायेंगे ये !! 

       रश्मि  विपिन अग्निहोत्री
      केशकाल ,जिला कोंडागांव

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