राज्य -उत्तर प्रदेश
कविता का शीर्षक-सीमा का सिपाही
विषय -सीमा का सिपाही
लिए हुए फौलाद भेष है,
खडा किनारे सीमा पे।
चौडी़ छाती सर है ऊँचा ,
है ललकारें जिह्वा में।
लेकर के मजबूत इरादे,
जब बैरी को भरमाता ।
धरती हिलती अंबर रोता,
चीर कलेजा ले आता।।
देख नही सकता है कोई,
लालसा ले निगाहों में।
अविचल यूँ ही बढता जाये ,
रोडे़ आये राहों में।
बैरी चाहे बाहर से हो ,
या रूप लिये अपनों का।
पल में सबका नाश करे,
छलियों के हर सपनें का।।
सुमति श्रीवास्तव
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