जिला :- महासमुन्द
शीर्षक :- खिलखिलाता बचपन
विधा:- कविता
"खिलखिलाता बचपन"
उछलता - कूदता आँगन,
हिलोर लेता तन- मन,
मैया की आँचल में बैठा,
खिलखिलाता बचपन ।
उम्र के उस पड़ाव पर,
बढ़ाते नन्हें कदम,
आसमां पाने की जिद में,
रहते तैयार हरदम।
आसमां में गुनगुनाता,
खिलखिलाता बचपन ।
फूलों की बगिया में,
तितली के पंखों में,
प्यारी सी कलियों में,
भौरों की गुनगुन में,
हर्षित है तन- मन,
खिलखिलाता बचपन ।
गांव की गलियों में,
अनाज की बालियों में,
पोखर की लहरों में,
हवाओं के बहावों संग,
बहता जाता जीवन,
खिलखिलाता बचपन ।
दिवाली के दीपों में,
खाली से पीपों में,
रंगों की होली में,
आँगन की रंगोली में,
मुस्काता हर मन,
खिलखिलाता बचपन ।
व्याख्या:- उपरोक्त पंक्तियों के माध्यम से रचनाकार बचपन के उस उन्माद उमंग का चित्रण करते हुए कहते हैं कि बचपन छोटी छोटी खुशियों में सदा मुस्काता रहता है हर जिन्दगी के हर पहलुओं में बचपन का समय सदा ही सुखदायक और रंगीन होती है।
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