Monday, May 25, 2020

छत्तीसगढ़ के जाचगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना

नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---गीत
शीर्षक--- कवि मन बहुत जोरदार होथे
व्याख्या---- प्रस्तुत कविता में कवियों की कार्य शैली भावना और विचार का वर्णन किया गया है  ।
************************************************
 कवि मन बहुत जोरदार होथें

कवि मन बहुत, जोरदार होथें ।
रथें तिवरा के दार,राहेर दार होथें ।

देखंय अपन के सपना,बताथें परकें ।
दिखथें पतझड़ बरोबर, बहार होथें ।

अपन अघुवा नई होवंय,दुसर ल देखहीं ।
परके गर्दन बर जानले, तलवार होथें ।

भरे नदियां म कहीं, तऊंर के बता ।
सबों हो जाहीं पार,तभे पार होथें ।

तसने कस ओ महूं, खाथों नून मिरचा ।
बताथों घर म अपन, रोज तिहार होथे ।

पहिरथों जलहा फंदहा,गोठियाथों टेरीकाट ।
एक पैसा नहीं पाकिट,मुंह म बाजार होथे ।

धरे नानकन नौकरी, जेमा चलथे जिनगी ।
कथों नौकरी म सुख के, भण्डार होथे ।

लिखे कविता गिरधारी,अउ पढ़के बताय ।
 गोठ चंदा सुरुज कस, खुद अंधियारा होथें ।

5 comments:

  1. Bahut hi achi Kavita and bahut sudhar line Hai

    ReplyDelete
  2. Very nice song सही मे कवि मन बहुत जोरदार होथे! 👌

    ReplyDelete
  3. खिलेश कुमारMay 26, 2020 at 9:09 AM

    मस्त हावे रचना ह, मस्त हावै रचयिता।

    ReplyDelete
  4. छत्तीसगढ़ म मझनिया,बिहनिया,अंगाकर अऊ बासी के गुजार होथे।अऊ छत्तीसगढ़ के कवि गिरधारी लाल के रचना सब्बो ले जोर दार होथे।

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...