स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---गीत
शीर्षक--- कवि मन बहुत जोरदार होथे
व्याख्या---- प्रस्तुत कविता में कवियों की कार्य शैली भावना और विचार का वर्णन किया गया है ।
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कवि मन बहुत जोरदार होथें
कवि मन बहुत, जोरदार होथें ।
रथें तिवरा के दार,राहेर दार होथें ।
देखंय अपन के सपना,बताथें परकें ।
दिखथें पतझड़ बरोबर, बहार होथें ।
अपन अघुवा नई होवंय,दुसर ल देखहीं ।
परके गर्दन बर जानले, तलवार होथें ।
भरे नदियां म कहीं, तऊंर के बता ।
सबों हो जाहीं पार,तभे पार होथें ।
तसने कस ओ महूं, खाथों नून मिरचा ।
बताथों घर म अपन, रोज तिहार होथे ।
पहिरथों जलहा फंदहा,गोठियाथों टेरीकाट ।
एक पैसा नहीं पाकिट,मुंह म बाजार होथे ।
धरे नानकन नौकरी, जेमा चलथे जिनगी ।
कथों नौकरी म सुख के, भण्डार होथे ।
लिखे कविता गिरधारी,अउ पढ़के बताय ।
गोठ चंदा सुरुज कस, खुद अंधियारा होथें ।
Bahut hi achi Kavita and bahut sudhar line Hai
ReplyDeleteVery nice song सही मे कवि मन बहुत जोरदार होथे! 👌
ReplyDeleteBhut bdiya sir...
ReplyDeleteमस्त हावे रचना ह, मस्त हावै रचयिता।
ReplyDeleteछत्तीसगढ़ म मझनिया,बिहनिया,अंगाकर अऊ बासी के गुजार होथे।अऊ छत्तीसगढ़ के कवि गिरधारी लाल के रचना सब्बो ले जोर दार होथे।
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