Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- सीमा

रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर 
जिला  -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा -- कविता (वीर रस )
शीर्षक -- "आज वतन की सीमा पर" 

आज  वतन  की  सीमा  पर  ,
अपनी  जान  गवां देंगे  हम  ।
शान   ए  रंग  के  खातिर  ,
लहू  अपनी  बहा  देंगे हम ।।
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सब्र  है  जब  तलक  सीने  में ,
दुश्मने  जहां  तू मौज मना ले ।
सब्र  गए  जो  हद   से  गुजर  ,
तेरे कदमो तले कब्र बना देंगे ।।
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सरहद  का  हर  मंजर  अब  ,
वीरों   से   हम  सजा   देंगे  ।
भूले  से कोई भूल  न करना ,
कफन  तेरे  नाम  लगा  देंगे ।।
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डट  जाएंगे  सीमा  पर  ,
घुसपैठ  न  आने  देंगे  ।
रूह  मौत  की  कांप  उठे ,
दुश्मन को ऐसी सजा देंगे ।।
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रख  आतंको   पर  कडी़  नजर ,
बुरी नजरों से वतन को बचाएंगे ।
मौत   भी   जिन्हें   दुत्कारेगी ,
जिंदगी  शत्रु की ऐसी बना देंगे ।।
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मिट  जाएंगे  खुद  सरहद  पर ,
निशां  वतन  का  न मिटने देंगे ।
अमन  देश  का मिटाने  वाले  ,
हम तेरा नामोंनिशां मिटा देंगे ।।
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व्याख्या  --- प्रस्तुत कविता देश भक्ति से ओत प्रोत वीर रस की कविता है ।
1. कवि देश के जवानो के माध्यम
से कहता है कि आज हम देश की 
सुरक्षा के लिए जान भी दे देंगे तथा अपने देश की शान के लिए
अपनी लहू बहाने को भी तैयार हैं।
2. देश के सैनिक सीमा पार के दुश्मनो को आगाह करते हुए कहते हैं कि तुम हमारे सब्र का
इम्तिहान न लो यदि हमारा सब्र टुटा तो तुम्हारा मरना निश्चित है ।
3. हमारे मुल्क की सीमा पर चारो 
तरफ चौकसी किए हुए हैं  यदि तुमने हमारी सुरक्षा में दखल दिया
तो  तेरा मरना तय है ।
4 . हम देश की सीमा निरंतर डटे
रहेंगे ,अगर कोई घुसपैठ पकडा़ जाता है तो हम उन्हें इतनी बुरी तरह मारेंगे कि मौत की भी रूह घबरा जाए भयभीत हो जाए ।
5 . हम देश की सुरक्षा करते हुए बुरे नियत वाले शत्रुओं से बचाएंगे
तथा ऐसे पकडे़ गए लोगों की जीवन को मौत से भी बत्तर बना 
देंगे ।
6 . हमारे भारत देश के सैनिक के माध्यम  से कवि कहते हैं कि हम देश की रक्षा के लिए खुद बलिदान हो जाएंगे और हमारे देश पर बुरी नजर रखने वाले 
का ही दुनियां से नामोनिशां मिटा
देंगे ।।
इस प्रकार मेरा उक्त कविता का आशय है।।
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