जिला बेमेतरा
विधा कविता
मौत का भय
मौत का भय नहीं रहा,
अब तो इंसानों में।
सबके सब भाग रहे हैं,
माया के जंजालों में।
आज सारे जगत में देखो,
कोरॉना का काला छाया हैं।
फिर भी सरकारी निर्देशों का,
उल्लंघन करना इंसानी माया हैं।
कहां आज हैं सोशल डिस्टेंसिं ग ,
कहां क्वारांटेन का पालन हैं।
सब नियमों को तोड़ने की कोशश करना,
आज के इंसान की शान हैं।
सरकार ने लॉक डॉउन करवाई,
आर्थिक मंदी भी झेली हैं।
महामारी से बचने के,
उपाय साझाए लोगों को।
पर इंसान नहीं सुनेगा,
अपनी ही मन की करेगा।
नियम लाएगी सरकार,
उनको तोड़ने की कोशिश ये इंसान करेगा।
क्यों?............….
क्योंकि मौत का भय नहीं रहा,
अब तो इस संसार में।
सबके सब भाग रहे हैं,
माया के जंजालों में।
__________________________
भावार्थ
वर्तमान समय में मै मेरे आस पास जो स्थिति बन रही हैं उसी पर कविता लिखा हूं।
अभी कोरोणा का प्रकोप सारा संसार झेल रहा है ऐसे समय में सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही हैं अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए। पर क्या आम या खास जो भी सरकार के इन प्रयास को सफल बनाने में कहां तक योगदान दे रहे हैं। जहां तक मैं अपने आस पास देखता हूं मै,हम, सरकार का साथ नहीं दे पा रहे हैं जब भी हमें थोड़ी सी छूट मिलती हैं हम उसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने का प्रयत्न करते हैं। इसकारण मुझे खुद पर और लोगों पर गुस्सा आता हैं जिसे कविता के माध्यम से व्यक्त किया हूं।
सूर्य प्रकाश पाटिल
Bahut bahut sunder... Sargarbhit
ReplyDeleteबहुत सुन्दर सर जी बधाई हो।
ReplyDelete