Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से आनंद कुमार त्रिवेदी की रचना- विषाणु


रचनाकारः-आनंद कुमार त्रिवेदी
जिलाः-- रायगढ़
विषयः-रौद्र रस आधारित सृजन
शीर्षक ः-  "विषाणु "
विधाः- कविता
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विषाणु क्या बिगाड़ेगा ,
जब विश्वास से भरा हर मन हो।
विषाणु क्या हराएगा ,
प्रतिरोधक क्षमता से हर तन हो।

मानवता को पीड़ित करता,
अँधेरे का दूत तीनों कालों में।
परोक्ष रुप से मित्र सचेतक,
कुटिल भी है निज चालों में।।

वेश बदल लेता दनुज सा,
छद्म रुप में रहता है।
हर मौसम हर वातावरण में,
छिप-छिप वार करता है।।

मानव रुप भी धर लेता यह,
नालंदा तबाह कर देता है।
जयचंद कभी मीरजाफर बन,
विजयी अट्टहास कर लेता है।।

हे!मनुज रहना सचेत तुम,
विषाणुओं के आघातों से।
मानवता जिंदा रखना है,
अप्रत्यक्ष इन उल्कापातों से।।

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व्याख्या ः---प्रस्तुत पद्य में सामयिक कोरोना वायरस जैसी विपदाओं से मानव को सदैव सचेत रहकर,स्वयं को मजबूत बनाकर रखने और इससे निडर होकर रहने का संदेश दिया गया है।साथ ही हमारे समाज में भी विषाणु रुपी मनुष्य हैं उनसे भी सचेत रहने की आवश्यकता पर ध्यानाकर्षित किया गया है।

आनंद कुमार त्रिवेदी"आनंद"

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