जिले का नाम:- मुंगेली(छत्तीसगढ़)
शीर्षक:- देख तो संगी का होवत हे
विधा:- कविता
देख तो संगी का होवत हे
देख तो संगी का होवत हे,
चारो मुड़ा चारो खुँट म।
लबरा झबरा घर भरत हे,
चोरी डकैती लुट म।।
अरे धरम के रद्दा बताही कोन,
कोन ल हम जोजियाबो ग।
सबो के रेंगना टेड़गा बेड़गा,
काखर मेर गोठियाबो ग।।
अरे जहर बरोबर आगि उलगे,
देख तो मनखे हर घुँट म।
लबरा झबरा.....डकैती लुट म।।
अरे मनखे के चिन्हार नइहे,
कइसन जमाना आगे जी।
बोली बतरस मिठावत नई हे,
करु बरोबर लागे जी।।
सबके जिनगी खड़े हे भइया,
छल कपट अऊ झूट म।
लबरा झबरा.....डकैती लुट म।।
पर के पीरा समझै नही अब,
मनखे मनखे मन संसार म।
का होवत हे देख तो भगवन,
दुनिया के बाजार म।।
माथा अपन सजावत हावै,
देखावा के मुकुट म।
लबरा झबरा.....डकैती लुट म।।
जुरमिल सुम्मत रहौ सबझन,
कतेक जतनहू ये तन ल।
बाँध छाँद के राखौ भइया,
भटकत हावै ये "मन" ल।।
जिनगी के सार तभे हे संगी,
जुरथे नता जब अटूट म।
का धरे हे छल कपट म,
अऊ चोरी डकैती लुट म "2" ।।
नागेश कश्यप।।
No comments:
Post a Comment