Thursday, May 28, 2020

छत्तीसगढ़ के बालोद से शैलेन्द्र चेलक की रचना- मानवीय मूल्य

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
शीर्षक - मानवीय मूल्य
विधा -  दोहे 
               दोहे
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हार -जीत कब प्यार में ,
                    यह ही है आधार ,
जिनमें समर्पण न रहें ,
           फिर रिश्ता लाचार।। १।।
अपना -अपना सब कहे ,
                    घूम ले चहुँओर ,
संकट घर में आए जब ,
             तब मिले न ठौर ।।२।।
प्रीत - रीत जान के भी ,
            वहमी फिरे इन्सान ,
लेन-देन सम टिक पाए ,
           न होत हो बेजान ।।३।।
दया ,प्रेम सब जीव पर ,
              जो जन राखे गौर,
कष्ट सहकर रक्षक बनें ,
       सो सज्जन कछु और ।।४।।
     
                --  शैलेन्द्र चेलक --

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