जिले का नाम -रायगढ़
विधा-कविता
शीर्षक- जीवन मूल्य
जीवन मूल्य
सुख ,शांति ,संतोष ,आनंद,
निरंतरता में परमानंद।
यही है ,मानव का वास्तविक,
जीवन मूल्य।
समाधान के सुख मिले,
समृद्धि से मिले शांति ,
मानवीयता से संतोष मिले, व्यवस्था में जीने से आनंदी।
नियम ,नियंत्रण संतुलन,
यह है प्रकृति के तीन नियम,
न्याय, धर्म सत्य,
यह है सामाजिक नियम।
यही है जीवन का वास्तविक मूल्य ,
इसका पालन करने वाले होते है, ईश्वरीय तुल्य।
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व्याख्या- इस कविता में कवित्री मानव की वास्तविक मूल्य का अवगत कराते हुए कहती हैं, कि मनुष्य का वास्तविक मूल्य सुख, शांति ,संतोष ,आनंद है और इसकी निरंतरता बने रहने से परम आनंद की अनुभूति करते है। मनुष्य समाधान होकर जीता है। तो सुख की प्राप्ति करता है और परिवार में समृद्धि के साथ जीता है तो शांति का अनुभव करता है एवं समाज में माननीय आचरण से जीता है तो संतोष का अनुभव करता है और प्रकृति में तालमेल पूर्वक जीता है अर्थात व्यवस्था के साथ जीता है ,तो आनंद का अनुभव करता है। प्रकृति में तीन नियम ह-ै नियम, नियंत्रण संतुलन और समाज में तीन नियम है -न्याय ,धर्म सत्य यही नियम मनुष्य का वास्तविक मूल्य है जो व्यक्ति का पालन करता है। वह ईश्वर के तुल्य माना जाता है अर्थात ईश्वर के नियम को पालन करते हुए ईश्वर की प्राप्ति करता है। जीवन का वास्तविक लक्ष्य और मूल्य है।
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