Monday, May 25, 2020

छत्तीसगढ़ के जाचगीर-चांपा से फरूण यादव की रचना

नाम     :-  फरूण यादव
शीर्षक  :-  जिनगी अंधियार हे
जिला   :-  जांजगीर-चांपा,छ.ग.


          जिनगी अंधियार हे

हमर जिनगी अब्बड़ अंधियार हे
कोन सुनोइया दुख-पीरा के
कोन देखोइया मोर हीरा के
सब रहत हे अपन ले धुरिया म
धंधाय जम्मोझन कुरिया म
सबे के मुंह म लगे मास्क
देख के अइसन लागथे
आज बने घलो ह बीमार हे
हमर जिनगी अब्बड़ अंधियार हे...

मनखे मन निचट अपखया हे
कोन ल काकर से मया हे
एक दिन लागत हावै एक जुग
ये अलहन ले नइ ए कोनो आरूग
होगे हे सब जतर-कतर
जे ठउर ल देख
सबो कति सफा उजार हे
हमर जिनगी अब्बड़ अंधियार हे...

झन करबे संसो काल काय होही
ये अंधियारी बेरा पहाबे करही
नइ रहै नंगत दिन एहा
लहुठ के अंजोर आबे करही
घर म बइठ के धीरज धर
भले ही आज हे मुँधियार
मगर काल्हि सुग्घर तिहार हे
अब कइसे कहौंव,
हमर जिनगी अब्बड़ अंधियार हे...

                        - फरूण यादव 
 _____________________

6 comments:

  1. छतीसगढी कविता,बहुत ही अच्छा फरुण यादव जी👍👌

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर कविता है

    ReplyDelete
  3. मुझे और मेरी रचना को आशीष प्रदान के लिए आपका अनंत आभार...✍️🙏

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...