विधा:- मुक्तक
शिर्षक:- वीर महाराणा
पता:- तमनार ,,रायगढ़, छत्तीसगढ़
*वीर महाराणा*
हे धीर वीर मेवाड़ मुकुट,तेरी शौर्य गाथा महान है।
राजपूतानी रौब अद्भुत,झुक जाती आसमान है।।
इतिहास के पन्नो पर चमकते,स्वर्ण अक्षर पर नाम है।
ये बीर कथा है महाराणा की,जो भारत की शान है।।
हे धन्य है वो मेवाड़ी माटी ,जिसने देखी तेरी जवानी है।
मातृभूमि से ये प्यार कैसा,कर दी सब कुछ कुर्बानी है।।
झुका न रूखी सुखी खाकर ,सपूत स्वाभिमानी है।
ये वीर कथा है महाराणा कि, इसकी अमिट कहानी है।।
हिमालय सा छाती लेकर,जब रण में अड़ जाते थे।
भयभीत हो जाते दुश्मन,धड़कन भी बढ़ जाते थे।।
देख भुजाएं गज शक्ति सा,फौजी धरती पर गढ़ जाते थे।
ये वीर कथा है महाराणा की,जो मौत से लड़ जाते थे।।
दहशत में आ जाते अकबर,
महाराणा के हुंकारों से ।
कट लाश बिछ जाते थे,उसके खूनी तलवारों से।।
सुर्ख लाली से रंग जाती धरती,लहू के बौछारों से।
ये वीर कथा है महाराणा कि,चीत्कार निकलती लालकारों से।।
मुगलों की चीखें ,जब आसमान पर छाती थीं।
हल्दीघाटी का नाम सुनकर,काल भी घबराती थी।।
दूर से ताकती रह जाती
मौते,
देख राणा को डर जाती थी।
ये वीर कथा है महाराणा की,जिससे दुनिया थर्राती थी।
हवा से जब बातें करते,चेतक के रफ्तारों से।
शत्रुओं की सांसें थम जाती,एक झटके के वारों से।
दुश्मन भी गले लग जाते,देख तेरे संस्कारों से।
ये वीर कथा है महाराणा की,खेलते सदा अंगारों से।।
कोई सन्धि स्वीकार नही ,मातृभूमि से व्यापार नही।
देश की आन पर मर मिट जाते ,पर झुकने को तैयार नही।।
फर्ज के लिए गद्दार नही,बंट जाएं वो दीवार नही।
ये वीर कथा है माहाराणा की,इनसे बढ़कर खुद्दार नही।।
मैलिक रचना
अजय पटनायक
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