जिला - कबीरधाम
शीर्षक -- बेवफा
विधा - दोहा
कसमें वादे तोड़ कर, हुई बेवफा यार।
चली गई अब दूर वह, करके आँखे चार।।
समझा था हमने तुझे , देगी पक्का साथ।
बीच राह में ही हमें, छुड़ा गई तू हाथ।।
झूठा था इजहार भी, दिया तुने जो फूल।
चूभ रहा बनकर वही , आज ह्रदय में शूल ।।
याद करे दिन रात हम, तू क्या जाने दर्द ।
आँसू बहते आँख में, गर्मी हो या सर्द ।।
प्यार कभी करना नहीं, पकड़ो अब ये कान।
बर्बादी ही जान लो , माटी तू भी मान ।।
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
बहुत बहुत धन्यवाद यादव जी
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