जिला बेमेतरा (छ ग)
विधा कविता
शीर्षक _ मानव और प्रकृति
दूर गगन में तारे रहते,
मै भी ताकता तुम भी तकते।
आओ तारे पास हमारे,
मै भी कहता तुम भी कहते।
आज गगन का हैं नज़ारा,
मै भी कहता तुम भी कहते।
हवा कह रही हैं मानव से,
आज मैं स्वच्छ बह रही हूं।
ऐसे ही मुझको बहने दे दो ना,
मत घोलो प्रदूषित वायु।
मत घोलों जहरीली गैसों को।
हवा कह रही है.......
नदी कह रही है मानव से,
आज मैं स्वच्छ बह रही हूं।
ऐसे ही स्वच्छ मुझको रहने दो ना,
मत मिलाओ मुझमें प्रदूषित जल।
मत मिलाओ विषाक्त जल,
नदी कह रही हैं......
पंछी कह रहे है मानव से,
मुक्त गगन में हम उड़ रहे है।
स्वच्छ हवा में उड़ रहे है,
स्वच्छ जल हम पी रहे हैं।
ऐसे ही हमको उड़ने दे दो ना,
स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी।
हमेशा ही रहने दे दो ना,
पंछी कह रहे है मानव से.....
भावार्थ -लॉक डॉउन के समय सभी और प्रकृति स्वच्छ हो गई थी सारे तारे, हवा,जल, पंछी खुश थे पर ये विचार करने योग्य हैं कि इनकी यह खुशी कब तक बनी रहेगी? क्या कुछ ऐसा नहीं हो सकता कि मानव भी खुश रहे और यह प्रकृति भी स्वच्छ बनी रहे??
सूर्य प्रकाश पाटिल
Very good chhotu bhai... 👌👌
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