खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
विषय- रोटी
विधा- कविता
रोटी की कीमत क्या होती है?
पूछो एक मजदूर गरीब से।
मेहनत करते हैं दिनभर ,
फिर भी तड़पते हैं पेट भूख से।
रोटी पाने की आस में,
बच्चे ईंट उठाते नन्हे- नन्हे हाथों से।
नंगे पांव करते काम ,
कभी ना होती दोस्ती खिलौनों से।
क्या ठंड क्या सर्दी,वर्षा,
पूछो मेहनतकश मजदूर से।
दो वक्त की रोटी पाने,
लड़ते हैं दिनभर अपने तकदीर से।
अमीर कुत्तों को रोटी खिलाते,
पहरेदार समझकर शान से।
मजदूर को रोटी कौन खिलाए?
संघर्ष करते जो बच्चों के अरमान से।
रोटी की कीमत क्या होती है?
पूछो एक लाचार भाई से।
बहन की पेट की भूख मिटाने,
नाता तोड़ देते हैं पढ़ाई से।
होटलों में बर्तन धोते भाई,
बहन की राखी बंधे कलाई से।
रोटी पाने को मजबूर,
नाता जोड़ लेते हैं गर्म तवा कढाई से।
रोटी की कीमत क्या होती है?
पूछो एक अनाथ बेटी से।
वहशी दरिंदों के सामने जो,
कपड़ा उतरवा देती है तन से।
दो बित्ते की पेट कारण,
भागमभाग करती खुद की गरीबी से।
मजबूरी के दिन बीता,
शाम आँख मिलाती हैं रोटी से।
रोटी की कीमत क्या होती है?
पूछो एक असहाय मजदूर से।
पेट की भूख मिटाने रोटी ,
शहर की ओर ले जाते दूर गांव से।
निर्धन के हाथ ईंट पत्थर उठाते,
जख्मी हाथों महल बनाते सुन्दर से।
जिन हाथों नेअन्न उगाया,
वही रोटी को निहारते हैं दूर से।
अमीरों की थाली में रोटी सजी,
गरीब सड़कों पर तड़पते हैं भूख से।
स्वरचित रचना
श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़ से
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