Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से डिग्री लाल जगत निर्भीक की रचना- पुकार

रचनाकार- डिग्री लाल जगत निर्भीक
जिला -रायगढ़
शीर्षक -पुकार
विधा -कविता
               पुकार
मानव कहलाने वाले मानव
दानवता को क्यों कर अपनाओ,
ईश्वर के पुत्र कहलाने वाले
धरती को स्वर्ग बनाओ।

आज मनुजता पर अंधकार है
अत्याचार अनाचार को दूर भगाओ,
भूख प्यास निर्बलता को
धरा से तुम मिल मिटाओ।

ऐटम बम बनाने वाले
मानव मन को बनाओ,
उजड़ रहे घर बिखर रहे मन
उनको बसा और मिलाओ।

आज मनुजता  भटक रही है
उसको पथ दिखलाओ,
राजनीति से धर्म न जोड़ों
सांप्रदायिकता से नाता तोड़ो।

नित हो रहे अनाचारों से ,धराऔ
मानव को तुम मुक्त कराओ,
भारत भूमि को फिर से 
सोने की चिड़िया बनाओ।
____________________________


 संक्षिप्त व्याख्या-
                   इस कविता में कवि मानवीयता को व्यक्त किया है मानव कहलाने वाले मानव आज दानव प्रवृत्ति को अपना रहा है मानव ईश्वर का पुत्र कहलाने वाले मानव धरती को स्वर्ग बनाओ आज मनुजता अर्थात मानवीय व्यवहार पर अज्ञानता छाया है इस अत्याचार और अनाचार को समाज से दूर भगाओ और भूखे प्यासे निर्बल(कमजोर) व्यक्तियों की सहायता कर इस कुकर्म कार्य को धरती से मिटाओ। हे ऐटम बम बनाने वाले मानव तुम बम बना कर क्या करोगे बनाना है तो तुम्हारे मन को पवित्र बनाओ और उजड़ेआशियाना को आबाद करो भ्रमित बिखरे मन को मानवीय की ओर ले जाओ। आज मनुष्यता भटक गयी है। उसको सही रास्ता दिखाओ शोषण रूपी राजनीति से दूर रहो और सांप्रदायिकता अर्थात सामान रुप से प्रदान की जाने वाली व्यवस्था को अपनाओ। आये दिन इस पृथ्वी पर अत्याचार हो रहा है। उससे तुम मुक्त कराओ और भारत भूमि को पुनः  एक समृद्धि शाली धरती बनाओ कहने का मतलब अमानवीय से मानवीता की और आगे बढ़ो और भारत के हर जनता समाधान समृद्धि भाव के साथ जीये। ऐसा कवि मानव की मानवीता के लिए पुकार रहे हैं।
डिग्री लाल जगत निर्भीक

2 comments:

  1. *माँ*
    ★★★

    एक ऐसा शब्द जो,कानों में रस घोलता है।
    पहली बार पहला शब्द जब बच्चा माँ बोलता है।

    माँ शब्द जितना छोटा दिखता अर्थ उतना गहरा है।
    इस दुनियाँ में सबसे खूबसूरत मेरी माँ का चेहरा है।

    वो ममता है, करूणा है, शक्ति है प्यार है।
    वो अपने बच्चों के लिए भरा पूरा संसार है।

    नौ महीने पेट में अपने खून से बच्चे को सींचती है।
    बच्चे के लालन पालन में रातों को आँखें भी न मींचती है।

    माँ केवल माँ नहीं अच्छी दोस्त और शिक्षक होती है।
    बिना कहे बातों को समझें ऐसी वो चिकित्सक होती है।

    पहला गुरू माँ ही होती,चाहे वो अमीर या गरीब है।
    रिश्तों का ऐसा बंधन,जो दिल के सबसे क़रीब है।

    बच्चों के भविष्य के लिए,वो पुरज़ोर कोशिश करती है।
    माँजने पड़े घरों के बर्तन, फिर भी इससे नहीं डरतीं है।

    प्यार,ममता,धैर्य, शक्ति ये माँ ही बच्चों में भरती है।
    निस्वार्थ का स्नेह दुनिया में केवल माँ ही करती है।


    माँ की भूमिका का मुझ से शब्दों में बयां ना हो पायेगा।
    दो चार दिन की बात नहीं पूरा जीवन कम पड़ जायेगा।

    आदर्श और संस्कारों का सम्मिश्रण है हर माँ
    सारे जहाँ से प्यारी है, मेरा आदर्श मेरी माँ।

    खुदा ने यदि माँ को न बनाया होता।
    ये ब्रह्माण्ड बिना संस्कारों के होता।
    ★★★


    _*सेतराम साहू "सेतु"*_
    _*पिथौरा महासमुंद*_
    🌺🌺🙏🏻🙏🏻

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