शीर्षक - ग़ज़ल - वो रखा करती
राज्य - रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
मेरी हर हरकत की वो खबर रखा करती
इश्क नहीं तो क्यों मुझपे नजर रखा करती।
यों नजरअंदाज करके पास से गुजरा करती
मेरे दिलो दिमाग पे अपना असर रखा करती।
सूनी राहों में मेरी ही तरफ बढ़ती चली जाती
क्यों मुझ पर भरोसा इस कदर रखा करती।
रातों का आलम तो सिर्फ चांद तारों को पता
वो गुजरी पर तेरा खयाल नई सहर रखा करती।
जिसकी छांव में करता है इंतजार 'सिंधवाल'
मेरी हर वफा का हिसाब वो शजर रखा करती।
-संदीप सिंधवाल
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