Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- गर्मी

नाम-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुन्द
मोब-  8103535652
शीर्षक- *गर्मी से बचने के उपाय*


नवतपा की विकराल धूप।
दिखाए अपना विकट स्वरूप।
गर्मी से हलकान जन जीवन।
बिगड़ गया देखो उसका रूप।1।
तेज धूप आग बरसाए अम्बर।
तेज धूप से बचना है अगर।
सुबह शाम काम निपटाओ।
घर में ही रहो रोज दोपहर।2।
नवतपा में बढ़ रहा सूर्य का पारा।
खूब पानी पीना ही एकमात्र सहारा।
घर में रहना ही है समझदारी।
गर घर से निकले तो दिन में दिखेगा तारा।3।
तालाब पोखर सूखे,घाट पड़े सुनसान।
नवतपा की तेज से,डरा हुआ है इंसान।
मटकी की पानी छाछ दही पुदीने की चटनी।
खा पी गर्मी से बचाएंगे ये तुझे इंसान।4।
कूलर व पंखे की चलेगी अब बात।
गर्मी से हलकान होंगे हम दिन रात।
सुबह शाम दोनों समय नहाने से ही।
नवतपा की गर्मी से मिलेगी निजात।5।
पीजिए मटका का ठंडा पानी।
जौ का सत्तू पीएं बताती दादी नानी।
स्वच्छ हो मन,स्वस्थ हो तन।
मस्ती करें,पीएं छाछ व नींबु पानी।6।
टहलें सुबह शाम की लें हवा।
क्योंकि ये है लाख दुखों की दवा।
व्यायाम करें,पीते रहें ठंडा पानी।
ये सब गर्मी से बचने की अचूक दवा।7।
नवतपा की भीषण गर्मी तन को है झुलसाय।
घर में रहकर कीजिये, देशी ही उपाय।
ए.सी. से दूरी,प्रीज का पीएं न पानी।
ये सब करके देखिए,गर्मी से बचने के हैं उपाय।8।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

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