जिला - कोण्डागांँव, छत्तीसगढ़
शीर्षक - ममता
विधा - काव्य
रस - वात्सल्य
तेरी मंजुल मूरत देख
संसार भूल जाती हूँ,
भूल जाती हूँ सब
कष्ट परेशानी थकान ,
बस तुझमें खो जाती हूँ ।
आ मेरी बिटिया पास
निहार लूँ अपलक,
देखकर मुख तेरा
जी लूँ मैं भी जरा,
देख तुझे एक झलक।
तुतली बोली तेरी
मिश्री की डली -सी,
सुनकर जी खिले
खिलती कली-सा ,
आ जा कुछ बोल तो ।
गोद में लेकर तुझे
आ थोड़ा दुलार दूँ,
ममता का मोल नहीं
सब कुछ मैं वार दूँ
आजा बिटिया मेरी।।
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