Friday, May 15, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना- प्रेम

नाम- अजय पटनायक
जिला:- रायगढ़,छत्तीसगढ़
विधा- मुक्तक काव्य
शिर्षक-
*आओ प्रेम की अमृत बरसायें*
*********************
ये चांद चले आना धरा में,चंचल चांदनी बिखर रही है।
सोलह कलाएं सुशोभित हो रही,कली बन कुसुम निखर रही है।।

पिया मिलन की रात हो गई ,गोपियां कृष्ण की सौगात हो गई।
बजने लगी बांसुरी की धुनें,प्रेम रस की बरसात हो गई।।
 तुम भी चले आओ सखा,आतातूर मन सिहर रही है।
ये चाँद चले आना धरा में, चंचल चांदनी बिखर रही है।।

 प्रेम की बूंदे अमृत बरसाए,याद पिया की मन को तरसाये।
 बदल रहे जर यौवन में,पुलकित मन हर्षाये।
शीतल उज्जवल निश प्रेम की ,फिर क्यों बिहर रही है।
 ये चांद चले आना धरा में, चंचल चांदनी बिखर रही है।।


 मृगतृष्णा की प्यास लगी है,तेरे आने की आस लगी है।
 बीत ना जाए ये सुहानी रातें , पूनम भी अब खास लगी है ।
मृगतृष्णा सा मन भटक रहा,क्यों अब तक घूम पीहर रही है।
ये चाँद चले आना धरा में, चंचल चांदनी बिखर रही है।। 

*व्याख्या* :- प्रेमिका प्रेमी से दूर है ऐसे में पूनम की रात में मिलन की आस लिए ब्यकुल होकर प्रेमी अपनी व्यथा सुना रहा है और प्रेमिका को बुला रहा है।

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