Friday, May 15, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- क्षण भंगूर जीवन

रचनाकार का नाम
नलिनी बाजपेयी
जिला -कांकेर
शीर्षक-क्षण भंगूर जीवन
विधा-मुक्त छंद

*क्षणभंगूर जीवन*

हे नटवर नागर मेरी पीड़ा हरो,
भवसागर में पड़ी नैया पार करो।

विरह वेदना में डूबा    मेरा मन,
अपने मधुर सुस्मित  हास भरो।

पतझड़ सा बन गया जीवन मेरा,
बसन्त बयार बन हर्षित कर दो।

अमावस की काली रातों ने घेरा,
तुम बन पूनम प्रकाश से भर दो।

अपने चरण -कमलों में शरण दो,
जीवन भर रत रहूँ ऐसा मति कर दो।

माया-मोह,तृष्णा ने नाच नचाया,
मैं मोक्ष पथ पर चलूं ऐसी युक्ति भर दो।

पानी का बुलबुला है क्षणभंगूर जीवन,
आवागमन भरा जीवन से मुक्त कर दो।

*व्याख्या*
        इस कविता में संसार की असारता,और जीवन की क्षणभंगुरता को बताया गया है,और केवल ईश्वर भक्ति से मोक्ष मिल सकती है यह बताते हुए चौरासी लाख योनियों से मुक्ति मिले ये प्रार्थना कृष्ण भगवान से की गई है।

नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर(,छ .ग.)

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